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Israel News Today: ग़ज़ा पर कब्ज़े की योजना बना रही इजराइली फौज और जंग के लिए अड़ी नेतन्याहू सरकार से अब उनके ही नागरिक ऊब गए हैं. फिलिस्तीनियों के नरसंहार को लेकर अब यहूदी फौज और नेतन्याहू को इजराइल में भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है. हजारों इजराइली नागरिकों ने कल देर रात तिल अवीव सहित देश के कई शहरों में सड़कों पर उतरे भारी विरोध प्रदर्शन किया.
इजराइली नागरिकों ने नेत्याहू सरकार से मांग की कि हमास के साथ सीजफायर पर जल्द से जल्द समझौता किया जाए, साथ ही कैदियों की रिहाई के लिए सकारात्मक पहल की जाए. नेतन्याहू सरकार के अड़ियल रवैये और ग़ज़ा पर अवैध कब्जे की योजना की वजह से महीनों से चल रही बातचीत के बावजूद इजराइल औ हमास के बीच कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया है.
वहीं, नेतन्याहू सरकार में शामिल दक्षिणपंथी मंत्रियों ने किसी भी तरह के समझौते का खुलेआम विरोध किया है. इजराइली वित्त मंत्री बेजलल स्मोटरिच ने तो यहां तक कह दिया कि अगर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सीजफायर के लिए समझौता करते हैं तो वे सरकार छोड़ देंगे.
इस बीच इजराइल के विपक्षी नेता और पूर्व रक्षा मंत्री बेनी गैंट्ज़ ने सुझाव दिया कि 'फिदा-अल-असरा' (कैदियों के लिए बलिदान) नाम की एक छह महीने की अंतरिम राष्ट्रीय सरकार बनाई जाए, जिससे हमास के साथ कोई समझौता किया जा सके.बेनी गैंट्ज़ ने कहा कि अगर बेंजामिन नेतन्याहू इस प्रस्ताव को ठुकरा देते हैं, तो यह साफ हो जाएगा कि अब तक हर संभव कोशिशें कर ली गई हैं.
मीडिल ईस्ट के एक्सपर्ट की मानें तो नेतन्याहू के लिए यह प्रस्ताव स्वीकार करना मुश्किल है, क्योंकि उनका सत्ता में टिके रहना दक्षिणपंथी गठबंधन पर निर्भर है. गैंट्ज़ ने कहा कि इस अंतरिम सरकार का पहला उद्देश्य ग़ज़ा में बंदी बनाए गए सभी 50 इजराइली कैदियों की रिहाई होनी चाहिए, जिनमें से सिर्फ 20 के जिंदा होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके बाद अगले साल नए चुनाव कराए जाएं.
क़ैदियों के परिजनों ने भी नेतन्याहू सरकार पर समझौता करने के लिए दबाव बढ़ा दिया है. एना ज़ांगा ओकर ने तेल अवीव में सैन्य मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए कहा, "हमारे बेटे 687 दिन से ग़ज़ा की नर्क जैसी जेल में हैं. नेतन्याहू आज ही समझौते पर दस्तख़त कर सकते हैं, जिससे 10 जिंदा कैदियों और 18 शवों की वापसी मुमकिन है. एना ज़ांगा ओकर के बेटे मातान को भी 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने पकड़ लिया था.
बताया जा रहा है कि जो नये समझौते का प्रस्ताव सामने आया है, वह अमेरिकी दूत स्टीव वेटकोफ की पुरानी योजना का ही बदला हुआ रूप है. इस प्रस्ताव के मुताबिक, 60 दिनों के सीजफायर के दौरान 10 इजराइली कैदियों के बदले में कई फ़लस्तीनी कैदियों को रिहा किया जाएगा. इसका मकसद दोनों पक्षों के बीच एक इंसानियत भरा समझौता कराना है.
दूसरी तरफ इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस शांति प्रस्ताव को मानने के लिए तैयार नहीं हैं. उन्होंने गुरुवार को एलान किया था कि इजराइली सेना को ग़ज़ा शहर पर पूरी तरह कब्जा करने की योजना की मंजूरी दे दी गई है. नेतन्याहू के फिलिस्तीनियों के नरसंहार की नीति का दुनिया के कई देशों ने पुरजोर विरोध किया है.
ग़ज़ा वही इलाका है जो पहले से ही जंग की वजह से बुरी तरह तबाह हो चुका है. वहां अब भी करीब 10 लाख आम लोग फंसे हुए हैं, जिनकी जान हर वक्त खतरे में है. इजराइली सेना का कहना है कि उनका मकसद हमास को पूरी तरह खत्म करना है. इसीलिए वो ग़ज़ा पर फिर से हमला करने की तैयारी कर रहे हैं, चाहे इसके लिए आम नागरिकों को कितनी भी तकलीफ क्यों न उठानी पड़े.
बता दें, इजराइली फौज 7 अक्टूबर 2023 यानी लगभग 685 दिनों से लगातार ग़ज़ा पर हमले कर रही है. इन हमलों में अब तक 62 हजार 263 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 11 हजार से ज्यादा लोग लापता है. यहूदी फौज के हमलों में 1 लाख 57 हजार 365 लोग घायल हैं, जिनके इलाज के लिए दवाईं और दूसरी चीजों की भारी किल्लत है.
इतना ही नहीं नेतन्याहू सरकार बीते कई महीनों से ग़ज़ा की चारों तरफ से नाकेबंदी कर दी है. इसकी वजह से वहां रोजमर्रा की चीजों के साथ दवाईंयों की भारी किल्लत है. ग़ज़ा में बढ़ते कुपोषण को लेकर यूनाईटेड नेशन ने दुनिया को आगाह किया है. ग़ज़ा में अब तक भूख से लगभग 300 लोग मारे गए हैं, जिनमें सैकड़ों बच्चे शामिल हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, ग़ज़ा में भूख से मरने वालों का आंकड़ा 620 तक पहुंच चुका है.