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Zee SalaamIsrael Hamas Warकौन थीं फातिमा हसौना? गाज़ा की वो आवाज़ जो अब खामोश हो गई

कौन थीं फातिमा हसौना? गाज़ा की वो आवाज़ जो अब खामोश हो गई

Fatima Hassouna: गाजा की 25 वर्षीय फ़िलिस्तीनी फ़ोटो पत्रकार फ़ातिमा हसौना अपनी शादी से कुछ दिन पहले ही इज़रायली हवाई हमले में मारी गई थीं. अपनी निडर युद्ध कवरेज के लिए जानी जाने वाली फ़ातिमा ने अपने पीछे एक ऐसी आवाज़ छोड़ने की कसम खाई थी जिसे दुनिया कभी नहीं भूलेगी.

कौन थीं फातिमा हसौना? गाज़ा की वो आवाज़ जो अब खामोश हो गई

Fatima Hassouna: पिछले दो सालों से गाजा में युद्ध चल रहा है. गाजा पट्टी पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुकी है और लाखों लोग भुखमरी से जूझ रहे हैं. इस बीच नेतन्याहू की सेना भारी बमबारी कर रही है. इस बमबारी में एक नौजवान पत्रकार फातिमा हसौना की जान चली गई है.

फातिमा जानती थीं कि उनकी ज़िंदगी हर वक्त खतरे में है, लेकिन उन्होंने कभी अपना कैमरा नीचे नहीं रखा. वे चाहती थीं कि दुनिया गाज़ा की सच्चाई, बर्बादी, विस्थापन, और लोगों के संघर्ष देखे. अपनी मौत से कुछ दिन पहले, फातिमा ने सोशल मीडिया पर लिखा था, "अगर मैं मरती हूं, तो मेरी मौत ऐसी होनी चाहिए जिसकी आवाज़ दूर तक गूंजे. मैं सिर्फ एक ब्रेकिंग न्यूज़ या आंकड़ा नहीं बनना चाहती. मैं एक ऐसी छवि छोड़ना चाहती हूं जिसे वक्त या ज़मीन दफना न सके."

कुछ दिनों में ही होने वाली थी शादी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकार फातिमा की शादी कुछ ही दिनों में होने वाली थी, लेकिन इससे पहले ही एक इजरायली मिसाइल हमले में उनकी जान चली गई. इस हमले में फातिमा के परिवार के 10 लोग मारे गए हैं, इनमें उनकी प्रेग्नेंट बहन भी शामिल हैं. साथ ही 50 से ज्यादा लोग भी मारे गए हैं. गाजा में लोग भूख से तड़प रहे हैं, लोग पानी के एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं.

अब तक कितने लोगों की हो चुकी है मौत
फातिमा की मौत ने दुनिया भर के पत्रकारों और मानवाधिकार समर्थकों को झकझोर दिया है. उन्होंने न सिर्फ एक पत्रकार के रूप में, बल्कि एक बहादुर इंसान के रूप में अपनी कहानी पूरी दुनिया को दी. ​गाज़ा में जारी इजरायली हमलों में अब तक 51 से ज्यााद फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,16,724 से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं. इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. लगातार हो रहे हमलों के कारण गाज़ा की 90 फीसद से ज्यादा आबादी विस्थापित हो चुकी है, और मानवीय संकट गहराता जा रहा है.

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Tauseef Alam

तौसीफ आलम पिछले चार सालों से पत्रकारिता के पेशे में हैं. उन्होंने देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. Amar Ujala,Times Now...और पढ़ें

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