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Israel West Bank Tensions: इजरायल लगातार नापाक हरकत कर रहा है. गाजा को तबाह करने के बाद नेतन्याहू का देश वेस्ट बैंक पर कब्ज़ा करने की पूरी तैयारी कर ली है. इजरायली रक्षा मंत्री योआव गैलेंट और वित्त मंत्री बेज़लेल स्मोट्रिच ने रविवार को एक सुरक्षा कैबिनेट बैठक में वेस्ट बैंक में जमीन रजिस्ट्रेशन और प्रॉपर्टी खरीदने की प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल दिया है. इजरायल का यह फैसला यहूदी बस्तियों के विस्तार का रास्ता साफ करेगा. एक जॉइंट बयान में दोनों मंत्रियों ने कहा कि ये फैसले दशकों पुरानी प्रशासनिक और कानूनी बाधाओं को हटाने, कथित तौर पर भेदभावपूर्ण जॉर्डन-युग के कानूनों को खत्म करने और जमीन पर बस्ती के विकास में तेज़ी लाने के लिए किए गए हैं.
इजरायल के नए नियम के तहत वेस्ट बैंक में जमीन के रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएंगे. अब तक, ये जमीन के रिकॉर्ड गोपनीय रखे जाते थे. योजना के अनुसार, अब आम नागरिक जमीन मालिकों के बारे में जानकारी देख सकेंगे और खरीदने के लिए सीधे उनसे संपर्क कर सकेंगे. इजराइली सरकार का कहना है कि इससे रियल एस्टेट लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा. सुरक्षा कैबिनेट ने एक कानूनी प्रावधान को भी खत्म कर दिया, जो गैर-मुसलमानों को उस इलाके में प्रॉपर्टी खरीदने से रोकता था. यह कानून उस समय का था जब यह इलाका जॉर्डन के नियंत्रण में था. अब तक, यहूदी नागरिक केवल स्थानीय कंपनियों के जरिए ही जमीन खरीद सकते थे, व्यक्तिगत रूप से नहीं.
सभी शर्तों को कर दिया गया है खत्म
जमीन या प्रॉपर्टी खरीदने के लिए जमीन रजिस्ट्रेशन अधिकारी से लेनदेन लाइसेंस लेने की जरूरत को भी खत्म कर दिया गया है. सरकार के मुताबिक, अब सिर्फ "पेशेवर मानक शर्तें" लागू होंगी, जिससे स्थानीय रियल एस्टेट बाज़ार में एक बड़ी प्रशासनिक बाधा दूर हो जाएगी. जॉइंट बयान में कहा गया है कि नई व्यवस्था के तहत यहूदी नागरिक अब वेस्ट बैंक के इलाकों में, जिसे इजरायल "यहूदिया और सामरिया" कहता है, उसी तरह जमीन खरीद सकेंगे जैसे वे तेल अवीव या यरूशलेम में खरीदते हैं.
हमास ने किया विद्रोह का आह्वान
इस बीच, हमास ने वेस्ट बैंक और यरूशलेम में बड़े पैमाने पर विद्रोह का आह्वान किया और सभी उपलब्ध साधनों से संघर्ष को बढ़ाने की कसम खाई. संगठन ने अरब और मुस्लिम देशों से इजरायल के साथ संबंध तोड़ने का भी आग्रह किया. एक्सपर्ट के मुताबिक, यह फैसला वेस्ट बैंक में पहले से ही अस्थिर स्थिति को और खराब कर सकता है और इजराइल-फिलिस्तीनी संघर्ष को एक नए राजनीतिक टकराव की ओर धकेल सकता है.