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Israel Hamas Ceasefire Proposal: इजरायल पिछले 23 महीनों से गाजा में नरसंहार कर रहा है. दुनिया भर के नेता इस नरसंहार को रोकने के लिए इज़रायल पर दबाव बना रहे हैं, लेकिन इज़रायल पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास और इजरायल के सामने सीजफायर का प्रस्ताव रखा है, जिस पर इजरायल और हमास सहमत तो हो गए हैं, लेकिन दोनों ने ऐसी शर्तें रखी हैं कि यह युद्धविराम समझौता होता नहीं दिख रहा है.
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि उनकी सरकार ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. उन्होंने कहा कि इजरायल अब इस संघर्ष को खत्म करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए दो शर्तें पूरी होनी जरूरी हैं. पहली गाजा में बंधक बनाए गए इजरायली नागरिकों की सुरक्षित वापसी और दूसरी, हमास को पूरी तरह से अपने हथियार डालने होंगे.
इजरायल के विदेश मंत्री ने किया ये ऐलान
गिदोन सार ने यह ऐलान हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में अपने समकक्ष पीटर सिज़ियार्तो के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया. उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने कल साफ कहा कि इजरायल इस प्रस्ताव को मानने के लिए तैयार है. हमारी सरकार ने भी युद्ध खत्म करने पर सहमति जताई है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि 7 अक्टूबर को गाजा से अगवा किए गए 48 बंधकों को रिहा किया जाए और हमास अपने हथियार छोड़ दे.”
वहीं, हमास ने ट्रंप के सीजफायर समझौते पर प्रतिक्रिया दी है. हमास ने एक बयान जारी कर कहा है कि अमेरिका ने युद्धविराम की पहल की है और उनके मध्यस्थों के ज़रिए बातचीत चल रही है. हमास ने कहा कि वे युद्धविराम के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी शर्त यह है कि युद्ध पूरी तरह से समाप्त हो और इज़राइली सेना पूरी तरह से वापस चली जाए.
ट्रंप का ‘अल्टीमेटम’
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 7 सिंतबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अब गाज़ा में समझौता जल्द हो सकता है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यह हमास के लिए अंतिम अल्टीमेटम है. ट्रंप ने लिखा, “इजरायल ने मेरी शर्तें मान ली हैं. अब समय है कि हमास भी मान ले. अगर उन्होंने इसे नहीं माना, तो इसके नतीजे भुगतने होंगे. यह मेरी आखिरी चेतावनी है.”
क्या है ट्रंप का सीजफायर प्लान
ट्रंप ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि हमास गाजा में बचे हुए 48 बंधकों को रिहा कर दे और बदले में हज़ारों फ़िलिस्तीनियों को इजरायली क़ैद से रिहा किया जाएगा. साथ ही, हमास और इज़रायल युद्ध समाप्त करने पर बातचीत करेंगे लेकिन इसमें एक बड़ा पेच है.
क्या है एक्सपर्ट की राय
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर हमास बंधकों को छोड़ देता है, तो उसके पास इज़रायल पर दबाव बनाने का कोई तरीका नहीं बचेगा. अभी तक इजरायल इस डर से ज़्यादा बड़े हमले नहीं कर रहा था कि कहीं बंधकों की जान न चली जाए. मगर जैसे ही बंधक आज़ाद हो जाएंगे, इज़रायल बिना रुके और ज्यादा ताकत से गाज़ा पर हमला कर सकता है. इससे गाज़ा में मौतों और तबाही का खतरा और बढ़ जाएगा.
इससे पहले भी दोनों के बीच नहीं बन पाई थी बात
इससे पहले भी कतर ने बीच में आकर इजरायल और हमास के बीच एक सीजफायर समझौता कराया था. इसमें शर्त थी कि हमास इजरायली बंधकों को छोड़ देगा और इजरायली सेना धीरे-धीरे गाजा से पीछे हटेगी लेकिन ये समझौता बीच में ही टूट गया. इजरायल ने फिर से गाजा पर हमला करना शुरू कर दिया. असल में बड़ी चुनौती ये है कि हमास को सिर्फ एक आतंकी संगठन मानकर खत्म नहीं किया जा सकता.
हमास नहीं छोड़ेगा हथियार
गाजा में हमास लोगों के बीच एक आंदोलन की तरह है, जो अपनी जमीन और हक की लड़ाई के नाम पर खड़ा है. हमास किसी भी शर्त में हथियार छोड़ नहीं सकता है. यही वजह है कि चाहे युद्धविराम हो भी जाए, लंबे समय तक टिक पाना मुश्किल हो जाता है.