HAJJ 2025: सऊदी अरब के किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज ने इस साल पड़ोसी मुल्क से आने वाले 1300 हाजियों को शाही दावत भेजने का निर्देश दिया है. मंत्रालय ने हाजियों की जियारत को कामयाब बनाने के लिए तैयारी शुरू कर दी है. इस कार्यक्रम का मसकद दूसरे देशों के साथ संबंधों को बेहतर करना है.
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HAJJ 2025: सऊदी अरब के किंग ने देशभर से आए लोगों के हज को कामयाब करने के लिए बड़ा ऐलान किया है. सऊदी के किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज ने इस साल हज (1346 एएच ) के लिए पड़ोसी मुल्कों से आने वाले 1300 पुरुष और महिला हाजियों को मेहमान के रूप में हज करने के लिए बुलाने का निर्देश जारी किया हैं.
सलमान बिन अब्दुल अजीज की यह मेजबानी दोनों मस्जिदों की जियारत के लिए आए मेहमानों के लिए की जा रही है, जिसका आयोजन सऊदी अरब के इस्लामिक मामलों और मार्गदर्शन मंत्रालय द्वारा किया जाएगा. वहीं सऊदी अरब के इस्लामी मामलों के मंत्री ने इस कार्याक्रम की पूरी जानकारी शेयर की हैं.
जियारत के साथ इस्लामिक जगहों को दौरा भी
इस्लामी मामलों के मंत्री डॉ. अब्दुल लतीफ अल-अशेख ने बताया है कि शाही निर्देश जारी होने के बाद से मंत्रालय ने मेहमानों और हाजियों को सभी सुविधा देने के लिए तैयारी शुरू कर दी है. इस कार्यक्रम के दौरान दोनों मस्जिदों की जियारत के साथ-साथ मदीना में इस्लामी और ऐतिहासिक जगहों का दौरा, साथ ही दोनों पवित्र मस्जिदों और इमामों के बारे में जानकारी दी जाएगी. इसके अलावा एक बैठक भी आयोजित होगी.
मंत्रालय द्वारा हर सुविधा मुहैया
इस कार्यक्रम में मक्का और मदीना के मस्जिदों की देखभाल, हज और उमराह के लिए आए लोगों के लिए सभी इंतेजाम किए जा रहे हैं. यह एक अनोखी परियोजना है, जिसका मसकद पड़ोसी देशों के साथ धार्मिक, शैक्षणिक और बौद्धिक नेताओं को मजबूत करना है. इस योजना के मुताबिक हज की शुरुआत से ही मंत्रालय द्वारा देशभर से आने वाले लगभग दस हजार हाजियों की यात्रा, धार्मिक और सांस्कृतिक सेवाओं की पूरी व्यवस्था मुहैया कराई जा रही है.
वैश्विक स्तर पर बेहतर छवि
इस शाही बुलावे में हाजियों के रजिस्ट्रेशन से लेकर हज यात्रा और उनकी वापसी तक की व्यवस्था शामिल है. इस्लामी मामलों के मंत्री ने जोर देकर कहा है कि यह मेजबानी इस्लाम और मुसलमानों की सेवा के लिए देश की अटूट प्रतिबद्धता का एक शानदार मिसाल है. इस्लामी मुल्कों के साथ संबंधों को मजबूत करने और वैश्विक मंच पर अपनी सकारात्मक भूमिका को बढ़ावा देने के लिए यह कार्यक्रम एक बेहतर कदम है, जो सऊदी विजन 2030 के इस्लामी और इंसानी लक्ष्यों के मुताबिक लिया गया है.