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Uttar Pradesh News Today: उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण अभियान जारी है. फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीख 4 दिसंबर 2025 है. वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने और बरकरार रखने के लिए लोग दस्तावेजों को इकट्ठा करने के लिए लंबी जद्दोजहद कर रहे हैं. इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार के एक फैसले की वजह से हड़कंप मच गया है.
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण (Date of Birth Proof) के रूप में मानने से इनकार कर दिया है. इस संबंध में राज्य के सभी सरकारी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं. जारी आदेश के मुताबिक, आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि किसी भी प्रमाणित सरकारी दस्तावेज के आधार पर दर्ज नहीं होती है, इसलिए इसे ऑफिशियली जन्मतिथि साबित करने के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा.
यह आदेश यूपी के योजना (प्लानिंग) विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह बंसल के जरिये जारी किया गया है. आदेश में कहा गया है कि सरकारी नौकरी की भर्ती, सेवा में पोस्टिंग, एडमिशन, सरकारी योजनाओं के लाभ और अन्य संवेदनशील प्रक्रियाओं में अब जन्मतिथि के लिए सिर्फ मान्य दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे. इनमें जन्म प्रमाण पत्र, हाई स्कूल प्रमाणपत्र या अन्य अधिकृत सरकारी रिकॉर्ड शामिल हैं. आधार कार्ड के आधार पर न तो उम्र की और न ही जन्मतिथि की पुष्टि की जाएगी.
दूसरी तरफ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से भी विशेष सूचना जारी की गई है. इसमें बताया गया है कि UIDAI ने देशभर में आधार डेटा को सही और अपडेटेड रखने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है. इस प्रक्रिया के तहत 2 करोड़ से ज्यादा मृत लोगों के नंबर डिएक्टिवेट कर दिए गए हैं, जिससे उनका गलत या गैर-कानूनी इस्तेमाल न हो सके.
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि एक बार किसी शख्स को जारी किया गया आधार नंबर किसी भी स्थिति में दोबारा किसी दूसरे शख्स को नहीं दिया जाएगा. मृत लोगों के आधार को बंद करवाने के लिए UIDAI ने इस साल एक नई ऑनलाइन सुविधा भी शुरू की है. फिलहाल यह सेवा देश की 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मौजूद है, जहां नागरिक 'माई आधार पोर्टल' के जरिए मृत परिजन से संबंधित जानकारी दर्ज करा सकते हैं.