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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मदरसों पर सरकार लगातार शिकंजा कसती जा रही है.सरकार ने कहा है कि राज्य के सभी मदरसों के वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कराई जाएगी. इस जांच का मकसद मदरसों में आने वाली विदेशी फंडिंग के स्रोतों का पता लगाना होगा.सरकार ने ये भी कहा कि यह जांच सिर्फ मदरसों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मदरसों के संचालकों के निजी बैंक खातों की भी जांच की जाएगी.
हालांकि, सरकार के इस आदेश का मदरसा संचालकों ने विरोध किया है.
गौरतलब है कि आजमगढ़ में मदरसों को लेकर बड़े पैमाने पर अनिमितता पाई गई थी, जहां बिना वेरिफिकेशन के कई मदरसों की मान्यता और अनुदान देने का मामला सामने आया था. इस मामले में एसआईटी की जांच में सिर्फ आज़मगढ़ में ही 219 ऐसे मदरसे पाए गए थे जो मानकों के मुताबिक संचालित नहीं किये जा रहे थे, जबकि कुछ ऐसे मदरसे थे, जो सिर्फ कागजों पर थे उनका ज़मीन सतह पर कोई वजूद ही नहीं था.
इन मदरसा संचालकों के खिलाफ जिले के विभिन्न थानों में मुकदमा दर्ज करने का सरकार ने आदेश दिया था. लेकिन अब योगी सरकार ने इन मदरसों के संचालकों पर विदेशी फंडिंग का संदेह जारी कर उनकी जांच कराने जा रही है. इस जांच में न सिर्फ मदरसों के लेन-देन की जांच होगी बल्कि, मदरसों के संचालकों के निजी बैंक खातों की भी जांच की जायेगी.
सरकार मदरसों को क्यों कर रही है टारगेट ?
सरकार लम्बे अरसे ये आरोप लगा रही है की नेपाल से सटे जिलों में बड़े पैमाने पर विदेशी फंडों के दम पर बड़े- बड़े मदरसे बना लिए गए हैं. इन मदरसों में सरकार ने देश-विरोधी काम होने की आशंका जाहिर की है, लेकिन अबतक ऐसी आशंकाओं को सच साबित करने में सरकार नाकाम रही है.हालांकि इस शक की बुनियाद पर सरकार इन मदरसों को बंद ज़रूर कर रही है. सरकार ये सब तब कर रही है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मदरसा चलाने के लिए कोई ज़रूरी नहीं है कि उसे किसी बोर्ड या सरकारी संस्थान से मान्यता हासिल हो. मदरसा निजी तौर पर चलाया जा सकता है, और ये किसी भी सूरत में गैर- कानूनी नहीं होगा. ये संवैधानिक अधिकार है कि कोई अल्पसंख्यक समूह अपने पसंद का शिक्षण संस्थान स्थापित कर उसका संचालन कर सकता है. सरकार ऐसे संस्थानों को आर्थिक सहायता भी दे सकती है.
सरकार एकतरफा निशाना बना रही है: मदरसा संचालक
इस मामले में आजमगढ़ के मुस्लिम वर्ग के लोगों का कहना है कि मदरसों के खाता- बही की जांच बिल्कुल कराई जानी चाहिए, इससे किसी को कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसकी आड़ में मदरसा संचालकों को बदनाम न किया जाए.लोग ये भी सवाल पूछ रहे हैं कि सरकार अगर मदरसे के पीछे पड़ी है तो अन्य संस्थाओं और सरकारी कर्मचारियों व अधिकारियों की भी जांच होनी चाहिए. सिर्फ मदरसों को निशाना न बनाया जाए. पिछले साल सरकार ने कई मदरसों को नियमों का हवाला देकर सील कर दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने उन मदरसों को फिर से चलाने का आदेश दे दिया. इससे राज्य सरकार बुरी तरह एक्सपोज़ हो गई है कि वो मदरसों को जान-बूझकर टारगेट कर रही है.