Voters lose faith in Muslim Identity politics: असम और पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों से ये निष्कर्ष सामने आ रहा है कि मुस्लिम वोटर्स ने मुस्लिम पहचान की सियासत करने वाली असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM , हुमायूँ कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) और असम में मौलाना बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF को खारिज कर दिया है. वोटर्स ने AIUDF पर भरोसा नहीं जताया. ये इस बात के संकेत हैं कि मुस्लिम वोटर्स अब इस बात को समझने लगा है कि उनके इस वोटिंग बेहैवियर से हिन्दू वोट एकजुट होता है, और जिसका फायदा अंततः भाजपा को मिलता है. इस चुनाव में मुसलमानों ने मुस्लिम पहचान की सियासत करने वाली पार्टी को तो हरा दिया, लेकिन दूसरे खेमे के वोटर्स एकजुट हो गए.
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नई दिल्ली: असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजे अब साफ़ हो गए हैं. दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार बनने जा रही है. इन दोनों राज्यों में मुस्लिम वोटर्स की अच्छी खासी आबादी है. मुस्लिम वोटों के सहारे चुनाव जीतने वाली तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस जैसे सेक्युलर दलों को इस चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा. लेकिन उससे भी ख़ास बात ये हैं कि इन चुनावों में मुस्लिम वोटर्स ने सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और मौलाना बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF को भी नकार दिया है. इसके साथ ही बंगाल में हुमायू कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी से भी दूरी बना ली. बंगाल में पहले ओवैसी और हुमायूं कबीर ने मिलाकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था, लेकिन बाद में दोनों अलग हो गए थे. इसी तरह असम में ओवैसी ने AIUDF के समर्थन में रैली और सभाएं की थीं, इसके बावजूद 2021 असम विधानसभा में AIUDF की 16 सीटें से घटकर अब सिर्फ दो सीटें रह गई हैं. यानी मुस्लिम वोटर्स ने इन्हें ज़रूर नकार दिया हो, लेकिन दूसरी तरफ इनके गठबंधन से जबर्दस्त ध्रुवीकरण हुआ. दोनों राज्यों के चुनाव अभियान में बाहर से गए भाजपा नेताओं, प्रधान मंत्री, गृह मंत्री, सांसदों, मुख्य मंत्रियों ने इस काम को बखूबी अंजाम दिया.
पश्चिम बंगाल की बात करें तो यहाँ यहाँ AIMIM ने मुस्लिम बहुल 12 सीटों पर अपने उमीदवार उतारे थे, लेकिन उनमें से एक भी खाता नहीं खुला. वैसे खाता खुलना तो दूर दो उमीदवारों को छोड़कर दीगर उमीदवारों को 1 हज़ार वोट भी नहीं मिले. वहीँ, हुमायू कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी को सिर्फ दो सीटों से संतोष करना पड़ा. दोनों सीटों रेजिनगर और नवादा में खुद हुमायू कबीर ने चुनाव लड़ा था, जबकि इस पार्टी ने 294 सीटों में लगभग 182 सीटों पर अपने उमीदवार उतारे थे.
पहले हुमायू कबीर और ओवैसी मिलकर चुनाव लड़ने वाले थे लेकिन चुनाव से ठीक पहले हुमायू कबीर का भाजपा से 1 हज़ार करोड़ की डील वाला एक विडियो वायरल होने के बाद ओवैसी से कबीर की पार्टी से अपना गठबंधन तोड़ लिया था, और दोनों ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा था. लेकिन बंगाल के मुसलमानों ने दोनों को नकार दिया. दोनों को बहुत कम मत पड़े हैं. मुस्लिम वोटर्स ने या तो TMC को वोट किया या फिर जहाँ विनिंग सिचुएशन में कांग्रेस के उमीदवार थे, उसे वोट किया है. कई सीटों पर हुमायू कबीर और ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवारों से ज़यादा आल इंडिया सेक्युलर फ्रंट के उमीदवारों ने वोट हासिल किये हैं.
असम में मुस्लिम वोटर्स ने किसे दिया वोट ?
असम में भी कुल 126 सीटों में 82 भाजपा के खाते में गए. कांग्रेस के खाते में 19 और AIUDF के खाते में 2 सीटें मिली हैं. परबतझोरा में लड़ाई कांग्रेस और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट के दो मुस्लिम उम्मीदवारों के बीच हुई. AIUDF के अबू ताहिर बेप्री यहाँ चौथे स्थान पर रहे, और उन्हें सिर्फ 5626 वोट मिले. गोलाकगंज में AIUDF उम्मीदवार जमशेद तालुकदार 2481 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच रही. गौरीपुर में AIUDF उम्मीदवार निजानुर रहमान दूसरे स्थान पर रहे. कांग्रेस से उनकी सीधी फाइट थी.
बिन्नाकांडी सीट से AIUDF के मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने खुद जीत दर्ज की है. उन्होंने अपने नजदीकी हरीफ असम जातीय परिषद के रेजऊल करीम चौधरी को हराया है. गोलपाड़ा पूर्व से कांग्रेस के अबुल kalaam रशीद आलम ने असम गन परिषद् के अब्दुर रहीम को हराया है. AIUDF के हाफिज बशीर अहमद 7838 वोटों के साथ चौथे स्थान पर रहे.
धुबरी सीट से कांग्रेस की बेबी बेगम ने 70 हज़ार से ज्यादा मतों से AIUDF के नजरुल हक को शिकस्त दी है. दलगांव से AIUDF के मजीबुर रहमान ने लगभग 30 हज़ार वोटों से स्वतंत्र उमीदवार ऐनुल हक़ को हराया है. चेंगा में AIUDF के अशरफुल हुसैन कांग्रेस के अब्दुर रहीम से लगभग 87 हज़ार वोटों से हार गए हैं. समागुरी में कांग्रेस के तन्जील हुसैन ने भाजपा के अनिल सैयका को 1 लाख से ज्यादा वोटों से हरा दिया है. AIUDF के अब्दुल अजीज तीसरे स्थान पर रहे हैं. करीमगंज नार्थ में कांग्रेस के जकारिया अहमद ने भाजपा के सुब्रत भट्टाचार्य को लगभग 19 हज़ार मतों से शिकश्त दे दी है. AIUDF के हिब्बुर रसूल तीसरे स्थान पर रहे हैं. करीमगंज साउथ में कांग्रेस के अमिनुर राशिद चौधरी ने असम गणपरिषद के इकबाल हुसैन को 7 हज़ार वोटों से मात दी है. AIUDF के शहिहाबुद्दीन 839 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे.
असम में AIUDF ने 27 सीटों पर अपने उमीदवार उतारे थे. लेकिन दो- 4 सीटों को छोड़ दिया जाए तो AIUDF मुस्लिम वोटर्स की पहली और दूसरी पसंद भी नहीं है. AIUDF से ज्यादा मुस्लिम वोटर्स ने कांग्रेस, असम गण परिषद और असम जातीय परिषद को वोट दिया है.
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