AIMPLB on Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन बिल को लेकर पूरे देश में सियासी पारा हाई हो गया है. सदन में बिल पेश होने से पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सेक्यूलर पार्टियों के साथ, सांसदों और अन्य दलों से इस पर अपना विरोध जताने की अपील की है.
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Waqf Amendment Bill 2025: केंद्र सरकार भारी विरोध के बावजूद बुधवार (2 अप्रैल) को सदन वक्फ संशोधन बिल पेश करेगी. बीजेपी की अगुवाई एनडीए सरकार को इस बिल पर जेडीयू और टीडीपी ने भी समर्थन देने का ऐलान किया है. बीजेपी और कांग्रेस ने व्हिप जारी किया है. इस बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने बीजेपी के सेक्यूलर सहयोगी दलों के साथ अन्य सांसदों से इस बिल को सदन में पारित होने से रोकने की अपील की है.
इसको लेकर AIMPLB ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश जारी किया है. इसमें कहा गया है कि बीजेपी के सहयोगी सेक्यूलर सियासी पार्टियों के साथ अन्य दलों, सांसदों से अपील है कि वे वक्फ संशोधन बिल का मजबूती से विरोध करें और किसी भी हाल में इसके पक्ष में मतदान न करें.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी ने सभी सेक्युलर पार्टियों और संसद के सदस्यों से अपील की है कि वे कल यानी बुधवार को संसद में पेश होने वाले वक्फ संशोधन बिल का न सिर्फ पुरजोर विरोध करें, बल्कि इसके खिलाफ मतदान भी करें. जिससे बीजेपी के सांप्रदायिक एजेंडे को रोका जा सके.
मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी ने कहा कि यह बिल न सिर्फ भेदभाव और अन्याय पर आधारित है, बल्कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 के तहत मौलिक अधिकारों के प्रावधानों के खिलाफ भी है. इस दौरान मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए.
खालिद सैफुल्ला रहमानी ने दावा किया कि इस बिल के जरिये बीजेपी वक्फ कानूनों को कमजोर करना चाहती है. बीजेपी का उद्देश्य इस बिल के जरिये वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करना और उनको तबाह बर्बाद करने के रास्ते तैयार करना है. उन्होंने कहा, "पूजा स्थल अधिनियम होने के बावजूद, हर मस्जिद में मंदिरों के खोजने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे अगर यह बिल पारित हो जाता है तो वक्फ की जायदादों पर सरकारी और गैर सरकारी दावों में इजाफा होगा. इससे कलेक्टर और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट्स के लिए इन जायदादों को जब्त करने का रास्ता साफ हो जाएगा."
AIMPLB के अध्यक्ष ने सार्वजनिक पत्र जारी कर दावा किया कि यह संशोधन वक्फ के उपयोगकर्ता के अधिकारों को समाप्त कर देगा, सीमा अवधि कानून से छूट को हटाएंगे, वक्फ बोर्डों और केंद्रीय वक्फ परिषद में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करेंगे और वक्फ ट्रिब्यूनल की शक्तियों को कम कर देंगे. उन्होंने कहा कि सभी बदलाव वक्फ संपत्तियों को उनके कानूनी संरक्षण से महरुम कर देंगे.
खालिद सैफुल्ला रहमानी ने कहा, "इस एक्ट में सरकारी संस्थाओं (केंद्र और राज्य सरकार, नगरपालिका निगम और अर्ध स्वायत्त निकाय) को शामिल करना और सरकारी दावों को वक्फ ट्रिब्यूनल के बजाय कलेक्टर या डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के जरिये सुलझाने का प्रावधान है. यह एक ऐसा संशोधन है जो सरकारी हस्तक्षेप को वक्फ संपत्तियों पर वैध बना देगा." उन्होंने कहा कि यह काबिले जिक्र है कि यह सुरक्षा अन्य समुदायों के धार्मिक संपत्तियों को भी दी की जाती है. इसलिए सिर्फ मुस्लिम वक्फ संपत्तियों को निशाना बनाना, भेदभाव और अन्याय है.
बता दें, बुधवार को मोदी सरकार ने सदन में वक्फ संशोधन बिल को पेश करने का ऐलान किया है. कयासों पर लगाम लगाते हुए एनडीए के घटक जेडीयू और टीडीपी ने वक्फ संशोधन बिल पर सरकार को समर्थन देने का ऐलान किया है. हालांकि समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, एआईएमआईएम समेत अन्य सियासी दलों ने इस बिल संसद सड़क तक विरोध करने का ऐलान किया है. अब सबकी निगाहें वक्फ संशोधन बिल और सदन में इसके पारित होने पर टिकी हैं. बीजेपी ने विपक्षी दलों पर मुसलमानों को वक्फ संशोधन बिल पर गुमराह करने के आरोप लगाए हैं.