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Ajmer News Today: खुदा हर इंसान में एक खास हुनर देता है, जो उसे दुनिया में पहचान दिलाता है. इस तरह के लोगों की पहचान अमर होती है. राजस्थान में भी कई ऐसे लोग हैं, जहां की संस्कृति, खान-पान, पहनावा और लोगों के रहने का स्टाइन पूरी दुनिया में मशहूर है. इसको देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग राजस्थान का रुख करते हैं.
ख्वाजा की नगरी अजमेर के इश्हाक खान भी इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं. इसकी वजह है कि उनकी खास मूंछें. बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की फिल्म 'शराबी' का मशहूर डायलॉग "मूंछें हों तो नत्थू लाल जैसी" आज भी लोगों के जेहन में बसा है, लेकिन अब राजस्थान के शाहपुरा के पार्षद डॉक्टर इश्हाक खान की वजह से यह डायलॉग नए अंदाज में चर्चा में है.
स्थानीय लोग अब सदी के महानयक अमिताभ के डायलॉग को अलग अंदाज में पेश करते हैं- 'मूंछें हों तो इश्हाक खान जैसी.' पुष्कर फेयर 2025 में डॉ. इश्हाक खान ने नेशनल अवॉर्ड जीतकर यह साबित कर दिया है कि उनकी मूंछें सिर्फ राजस्थान में ही नहीं बल्कि अब देश और विदेश में भी चर्चा का विषय बन चुकी हैं.
शाहपुरा के रहने वाले इश्हाक खान लंबे समय से अपने मूंछों की विशेष तरीके से देखभाल करते हैं और कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते आ रहे हैं. डॉ. खान ने बताया कि वे पिछले 7 सालों से पुष्कर मेले में आयोजित मूंछ प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहे हैं. पिछले 3 साल से वे दूसरे स्थान पर आ रहे थे, लेकिन इस बार उन्होंने कड़ी मेहनत और समर्पण से पहला स्थान हासिल किया है. इसके लिए वह तीन सालों से अपने मूंछों को बेहतर बनाने के लिए खास तरीके से देखभाल करते थे.
डॉ. इश्हाक खान ने कहा, "यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मुझे राजस्थान की कला और संस्कृति को दिखाने का मौका मिला. इस जीत से मेरा आत्मविश्वास और बढ़ा है." उन्होंने आगे कहा, "अब मेरी ख्वाहिश है कि मैं इंटरनेशनल लेवल पर भी अपने शहर शाहपुरा, अपने राज्य राजस्थान और अपने मुल्क हिंदुस्तान का नाम रोशन करूं."
डॉ. इश्हाक खान आज राजस्थान में दाढ़ी और मूंछों को लेकर काफी फेमस हो चुके हैं. लोग उन्हें 'मूंछों वाले पार्षद' के नाम से भी जानते हैं. पुष्कर फेयर में उनकी मूंछों का जलवा देखने लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं. अब सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय लोग तक यही कह रहें हैं कि 'मूंछें हों तो इश्हाक खान जैसी.'