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Ajmer Dargah Hearing: अजमेर दरगाह पर दावा किया गया है कि यह पहले शिव मंदिर हुआ करता था. आज इस मामले में सिविल कोर्ट में सुनवाई होनी है. बीते रोज हाईकोर्ट में एक पिटीशन दायर की गई थी. जिसमें पिटीशनर ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी तरह के आदेश/अंतरिम आदेश पर रोक लगाई हुई है, तो इस मामले में सुनवाई भी रुकनी चाहिए. इस मामले में कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई करने वाला है.
दरअसल खादिमों का कहना है कि सिविल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई रुकनी चाहिए. इसको लेकर अंजुमन कमेटी ने हाई कोर्ट में पिटीशन दायर की है. जिसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सिविल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई को रोका जाना चाहिए. खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जागदान ने अपनी याचिका में प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट का भी हवाला दिया है.
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की स्पेशल बेंच ने 12 दिसंबर को मज़हबी मकामात के खिलाफ नए मुदमों और सर्वे के आदेश पर रोक लगा दी थी. इस दौरान कोर्ट ने कहा था कि जब मामला हमारे सामने लंबित है तो ये उचित नहीं होगा कि कोई और अदालत इस मामले में सुनवाई करे. दरअसल, एससी ने संभल, ज्ञानवापि मस्जिद और शाही ईदगाह जैसे मामलों को लेकर ये टिप्पणी की थी.
इसी मामले को लेकर अंजुमन कमेटी ने ये याचिका दायर की है. हालांकि, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल आरडी रस्तोगी ने इसका विरोध किया है और कहा है कि पूरे मामले में अंजुमन कमेटी पक्षकार नहीं है. ऐसे में उनका हाई कोर्ट में आने का कोई अधिकार नहीं है. बता दें, मुल्क भर में अलग-अलग जगहों पर मस्जिद की जगह मंदिर होने के दावे किए गए हैं.