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मोहब्बत की निशानी से हिंदू महासभा को दिक्कत, ताजमहल के उर्स से पहले काटा बवाल

Akhil Bharatiya Hindu Mahasabha on Taj Mahal: आगरा में अखिल भारत हिंदू महासभा ने ताजमहल में होने वाले शाहजहां के तीन दिवसीय उर्स को लेकर हंगामा किया. विवादित संगठन ने उर्स को रद्द कराने की मांग की है. इसके इतिहास को झुठलाते हुए संगठन ने कहा कि ताज महल से जुड़ी हुई याचिका कोर्ट में लंबित है, तब तक यहां पर धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए.

 

हिंदूवादी संगठनों का ताजमहल में उर्स को लेकर बवाल
हिंदूवादी संगठनों का ताजमहल में उर्स को लेकर बवाल

Agra News: जिस ताजमहल को दुनिया मोहब्बत की निशानी मानती है, जिसकी खूबसूरती पर हर देश का सैलानी फिदा है, उसी ताजमहल को लेकर एक बार फिर सियासी और धार्मिक संग्राम छिड़ गया है. संगमरमर की इस इमारत की तारीफ करने की बजाय कुछ संगठन इसे अपने विवादों की जमीन बना रहे हैं. ताजमहल की चमक के बीच हिंदूवादी संगठनों की एक बार फिर नारे, ज्ञापन और चेतावनियों की गूंज सुनाई देने लगी है.

आगरा से बड़ी खबर सामने आई है, जहां अखिल भारत हिंदू महासभा ने ताजमहल में होने वाले शाहजहां के तीन दिवसीय उर्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संगठन ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस आयोजन को तत्काल रद्द कराने की मांग की है. सोमवार (12 जनवरी) को हिंदू महासभा के पदाधिकारी प्रशासन के सामने पहुंचे और ज्ञापन दिया. उन्होंने कहा कि 15, 16 और 17 जनवरी को ताजमहल में प्रस्तावित उर्स पूरी तरह नियमों के खिलाफ है.

अखिल भारत हिंदू महासभा नाम के इस संगठन का दावा है कि यह स्थान तेजोमहालय है और यहां भोले बाबा का ध्वज फहराया जाना चाहिए, न कि किसी अन्य धार्मिक आयोजन की इजाजत दी जानी चाहिए. ज्ञापन में कई विवादित और आपत्तिजनक दावे किए गए हैं. हिंदू महासभा ने आरटीआई और अदालती दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि मुगल काल या ब्रिटिश काल में ताजमहल में उर्स या नमाज की कोई लिखित इजाजत मौजूद नहीं है. 

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इतना ही नहीं संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें सिर्फ ताजगंज क्षेत्र के स्थानीय निवासियों को शुक्रवार के दिन जुमे की नमाज की इजाजत दी गई है, लेकिन किसी अन्य धार्मिक गतिविधि जैसे उर्स की इजाजत नहीं दी गई है. फिलहाल यह मामला आगरा सिविल कोर्ट (सीनियर डिवीजन) में लंबित है. यह केस बाद संख्या 63/2024 के तहत दर्ज है, जिसमें ताजमहल में उर्स पर रोक लगाने की मांग की गई है. इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी 2026 को तय है. 

हिंदू महासभा का कहना है कि जब तक अदालत का फैसला नहीं आ जाता, तब तक उर्स जैसे किसी भी आयोजन को रोका जाना चाहिए. यह विवाद नया नहीं है. मुसलमानों की अन्य धार्मिक स्थल की तरह पिछले कई सालों से हिंदू महासभा ताजमहल को तेजोमहालय होने का दावा कर रहा है. इतना ही नहीं, यह संगठन मुसलमानों के धार्मिक गतिविधियों पर रोक की मांग करता रहा है. संगठन ने इस बार भी चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा.

प्रशासन की तरफ से इस ज्ञापन पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. आमतौर पर ताजमहल में उर्स के दौरान तीन दिनों तक फ्री एंट्री रहती है, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक वहां पहुंचते हैं. इस बार उर्स से पहले ही ताजमहल फिर बहस, विरोध और चेतावनियों के बीच आ खड़ा हुआ है.

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Raihan Shahid

रैहान शाहिद का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले से हैं. वह पिछले पांच सालों से दिल्ली में सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. Zee न्यूज़ से पहले उन्होंने ABP न्यूज़ और दू...और पढ़ें

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