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Al Falah University Founder Arrest: अल फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी को ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया है. गिरफ्तारी दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी हमले की जांच के दौरान सामने आए कुछ कनेक्शनों की पड़ताल के बीच हुई है, क्योंकि हमले की साजिश से जुड़े डॉ. मुजम्मिल और आतंकी उमर नबी पहले अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े रह चुके हैं. इसी वजह से यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े संस्थानों की जांच तेज की गई थी.
आज ही दिल्ली, फरीदाबाद और आसपास के ठिकानों पर ED की छापेमारी चल रही थी. फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी के ऑफिस समेत कई जगहों से एजेंसी ने दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दूसरे महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की. ED ने यह कार्रवाई PMLA की धारा 19 के तहत की, जिसमें साक्ष्यों की विस्तृत जांच के बाद जावेद सिद्दीकी की गिरफ्तारी दर्ज हुई.
FIR में क्या आरोप हैं?
दर्ज FIR के मुताबिक, ED की जांच दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज दो FIR पर आधारित है। FIR में आरोप लगाया गया है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी ने NAAC मान्यता को लेकर छात्रों और अभिभावकों को गुमराह किया है. UGC Act की धारा 12(B) के तहत मान्यता होने का झूठा दावा किया है. झूठी मान्यता दिखाकर आर्थिक लाभ लेने और छात्रों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. UGC ने साफ किया है कि अल फलाह यूनिवर्सिटी सिर्फ धारा 2(F) के तहत एक राज्य निजी यूनिवर्सिटी के रूप में लिस्टेड है. उसने 12(B) के लिए आवेदन भी नहीं किया है और इस धारा के अंतर्गत किसी भी अनुदान की पात्र नहीं है.
कौन हैं जावेद अहमद सिद्दीकी?
जावेद सिद्दीकी मूल रूप से मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं और इंदौर की देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं. 1992 में उन्होंने अल फलाह इन्वेस्टमेंट कंपनी में निदेशक के तौर पर काम शुरू किया और बाद में अल फलाह ट्रस्ट की स्थापना की. इसके बाद उनका कारोबार शिक्षा, सॉफ्टवेयर, वित्तीय सेवाओं और ऊर्जा क्षेत्र तक फैलता गया, हालांकि बाद में इनमें से कई कंपनियां बंद हो गईं. फरीदाबाद के धौज गांव में 70 एकड़ में फैला अल फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस, जहां अल फलाह मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन भी संचालित होता है, फिलहाल जांच के केंद्र में है.
सिद्दीकी पर इससे पहले भी वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लग चुके हैं. साल 2000 में दक्षिण-पूर्व दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में निवेश धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था. वह 2001 में गिरफ्तार किए गए थे और 2004 में इस शर्त पर जमानत मिली थी कि वे निवेशकों का पैसा वापस करेंगे. अधिकारियों के मुताबिक, क्राइम ब्रांच अब जावेद सिद्दीकी के इन पुराने मामलों की भी दोबारा जांच कर रही है.