Aligarh Beef Biryani Notice Controversy: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दोपहर के भोजन में 'बीफ बिरयानी' परोसने वाला मामला तुल पकड़ रहा है. अब इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है.
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Aligarh Beef Biryani Notice Controversy: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में दोपहर के भोजन में 'बीफ बिरयानी' परोसने के नोटिस से विवाद खड़ा होने के एक दिन बाद, पुलिस ने आज यानी 10 फरवरी को इस मामले में दो स्टूडेंट्स और यूनिवर्सिटी के एक चीफ प्रोवोस्ट सहित तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी है.
पुलिस अधिकारी ने बताया कि सिविल लाइंस थाने में मोहम्मद फैयाजुल्लाह और मुजस्सिम अहमद, दोनों छात्रों और सर शाह सुलेमान हॉल के प्रोवोस्ट एफ आर गौहर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, जहां नोटिस लगाया गया था. प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 302 (जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द आदि बोलना), 270 (सार्वजनिक उपद्रव) और 353 (सार्वजनिक शरारत) लगाई गई है.
इस मामले में करणी सेना द्वारा ज्ञापन सौंपे जाने की बात कहते हुए, सर्किल ऑफिसर अभय पांडे ने कहा, "हमने मामले को गंभीरता से लिया है और जांच शुरू कर दी है." करणी सेना की उत्तर प्रदेश इकाई के प्रमुख ज्ञानेंद्र सिंह ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर एक संदेश वायरल हुआ है जिसमें कहा गया है कि सुलेमान हॉल में 'बीफ पार्टी' आयोजित की गई थी जिसमें एएमयू के शिक्षक और छात्र दोनों शामिल थे.
उन्होंने दावा किया कि इस कृत्य ने एएमयू में हिंदू छात्रों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. उन्होंने कहा कि करणी सेना सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करती है और उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासित किया जाना चाहिए. सुलेमान हॉल के दो 'अधिकृत' व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर जारी किए गए नोटिस में कहा गया है, "रविवार के दोपहर के भोजन के मेनू में बदलाव किया गया है और मांग के मुताबिक चिकन बिरयानी के बजाय बीफ बिरयानी परोसी जाएगी."
एएमयू प्रशासन ने दी सफाई
नोटिस पर हंगामा मचने के बाद एएमयू प्रशासन ने रविवार को स्पष्ट किया कि इसमें "टाइपिंग की गलती" है और आश्वासन दिया कि जिम्मेदार लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. एएमयू के जनसंपर्क विभाग की सदस्य विभा शर्मा ने कहा, "मामला हमारे संज्ञान में लाया गया था. हमने पाया कि नोटिस खाने के मेन्यू के बारे में था. हालांकि, इसमें स्पष्ट टाइपिंग त्रुटि थी. नोटिस को तुरंत वापस ले लिया गया क्योंकि इसमें कोई आधिकारिक हस्ताक्षर नहीं थे, जिससे इसकी प्रामाणिकता पर संदेह पैदा हुआ." उन्होंने कहा, "हमारे प्रोवोस्ट ने (नोटिस जारी करने के लिए) जिम्मेदार दो वरिष्ठ छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। हम विश्वविद्यालय के नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं."