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Sambhal News Today: उत्तर प्रदेश सरकार ने इस साल बड़े पैमाने पर कथित अवैध निर्माण का हवाला देते हुए बड़ी संख्या में मुसलमानों के धार्मिक स्थलों और मदरसों को ढहा दिया या फिर सील कर दिया. योगी सरकार के जरिये लगातार की जा रही है, इस कार्रवाी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. इसकी वजह यह है कि इनमें से कई धार्मिक स्थल सैकड़ों साल पुराने थे.
शाही जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हुई हिंसा के बाद संभल भी सुर्खियों में है. यहां पर लगातार अल्पसंख्यक समुदाय के घरों, धार्मिक स्थलों और मदरसों के खिलाफ कार्रवाई जारी है. बीते कई दिनों से संभल जिले के असमोली क्षेत्र में राया बुजुर्ग गांव में अवैध मस्जिद और मदरसे का मामला चर्चा में है. स्थानीय प्रशासन का दावा है कि यह सरकारी तालाब और खलिहान की जमीन पर बना है.
इसी के मद्देनजर बीते दिनों कथित अवैध निर्माण को प्रशासन के जरिये बुलडोजर से ध्वस्त करने की योजना बनाई जा रही थी. प्रशासन ने मस्जिद की इंतजामिया कमेटी को चार दिन की मोहलत दी थी ताकि वे अवैध निर्माण को खुद हटाने की व्यवस्था कर सकें. प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने हाईकोर्ट ने याचिका दायर कर डिमोलिशन की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की.
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद स्थानीय प्रशासन के मस्जिद और मदरसे को ध्वस्त करने की कार्रवाई पर रोक लगाने से इंकार कर दिया. हाईकोर्ट के फैसले के बाद मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने खुद ही कार्रवाई करने का फैसला लिया. कमेटी ने जेसीबी की मदद से खुद ही मस्जिद और मदरसे को ध्वस्त करने का काम शुरू कर दिया है. इसकी खूब सराहना हो रही है.
मस्जिद-मदरसा कमेटी का कहना है कि वे प्रशासन की इजाजत और दिशा-निर्देशों के तहत ही यह कदम उठा रहे हैं. राया बुजुर्ग गांव की इस घटना को लेकर प्रशासन ने कहा कि किसी भी तरह के निर्माण के मामले में कानून का पालन होना जरुरी है और नियमों का पालन न करने पर अनाधिकृत निर्माण को हटा दिया जाएगा.