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Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में मदरसों के खिलाफ आर्थिक जांच, वैधता की जांच समेत कई प्रकार की जांच हो रही है. साथ ही मदरसों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई भी की जा रही है. इन सब के बीच इलाहाबाद से राहत देने वाला एक फैसला सामने आया है. दरअसल, केंद्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में सरकार द्वारा अनुमोदित मदरसों की जांच आर्थिक अपराध शाखा (IOW) कर रही थी. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मदरसों की जांच पर रोक लगा दी है.
केंद्रीय मानवाधिकार आयोग ने सरकार द्वारा अनुमोदित मदरसों में आलीम, फाजिल के वेतन भुगतान पर आपत्ति जताई थी और इसे वित्तीय भ्रष्टाचार करार दिया था. मदरसा के खिलाफ IOW द्वारा की जा रही जांच के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में मदरसा अरबिया यूपी और प्रबंध समिति मदरसा मदीनतुल उलूम जलालीपुरा की ओर से रिट याचिका दायर की गई थी.
इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मदरसा के पक्ष में फैसला सुनाया है और IOW की जांच पर रोक लगा दी है. साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय मानवाधिकार आयोग समेत सभी 18 विरोधियों से इस मामले पर चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है.
हाई कोर्ट के डिवीजन पीठ ने इस मामले को 7 नवंबर 2025 को फिर से पेश करने का आदेश दिया गया है. बता दें कि इस मामले की सुनवाई जस्टिस सरिल श्रीवास्तव और जस्टिस अमिताभ कुमार रॉय की पीठ कर रही है. वहीं, अदालत ने एसोसिएशन के वकीलों जीके सिंह, प्रशांत शुक्ला, मोहम्मद अली औसाफ और एचपी शाही की दलीलों से सहमति जताते हुए कहा कि आयोग कोई सेवा न्यायाधिकरण नहीं है और मदरसों में नियुक्तियों की जाँच उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है.
इस फैसले से खासकर कामिल, फाजिल की साख वाले नियुक्त शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक ही व्यक्ति ने मानवाधिकार आयोग में 558 मदरसों के खिलाफ 55 शिकायतें दर्ज कराई थीं, जिसके आधार पर वेतन भुगतान रोकने और आर्थिक अपराध शाखा (IOW) से जांच कराने का आदेश जारी किया गया था.