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‘I Love Muhammad’ पोस्टर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी को जमानत

Allahabad High Court on I Love Muhammad Poster Case: ‘I Love Muhammad’ पोस्टर विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी नदीम को जमानत दे दी है. कोर्ट ने कहा कि कथित आपत्तिजनक पोस्ट में किसी खास समुदाय का नाम नहीं लिया गया था, जिससे आरोपी को राहत मिली है.

‘I Love Muhammad’ पोस्टर केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी को जमानत

I Love Muhammad Poster Case: उत्तर प्रदेश में पिछले साल 'I love Muhammad' पोस्टरों को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया था. इस विवाद के संबंध में कई जिलों में मुस्लिम युवकों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे. अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आरोपी को बड़ी राहत दी है. 7 महीने से जेल में बंद आरोपी नदीम को कोर्ट ने जमानत दे दी है. इसके साथ ही कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है.

दरअसल, आरोपी नदीम ने 'I love Muhammad' पोस्टर विवाद के दौरान अपने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट किया था. यूपी पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 353(2), 192, और 152 के तहत मुकदमा दर्ज किया था और गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था.  इसी मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नदीम को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने कहा कि  'कथित तौर पर आपत्तिजनक' पोस्ट में किसी खास जाति या समुदाय का नाम नहीं लिया गया था. इस मामले की सुनवाई जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की एकल-न्यायाधीश पीठ ने की.

आरोपी के वकील ने क्या कहा?
आरोपी नदीम मुजफ्फरनगर जिले का रहने वाला है. हाईकोर्ट में नदीम की ज़मानत अर्जी पर बहस करते हुए उसके वकील ने कहा कि अब चार्जशीट दाखिल कर दी गई है. इसके अलावा, ऐसा नहीं लगता कि ट्रायल जल्द ही खत्म हो जाएगा. वकील ने यह भी बताया कि अर्जी देने वाले का कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं है. दूसरी ओर, ज़मानत अर्जी का विरोध करते हुए राज्य सरकार के सरकारी वकील ने दलील दी कि आरोपी ने एक असंवेदनशील टिप्पणी पोस्ट की थी.

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सरकारी वकील ने दी ये दलील
सरकारी वकील ने तर्क दिया कि आरोपी के पोस्ट की वजह से बरेली में हिंसा भड़की, जिससे संपत्ति को भारी नुकसान हुआ था.  साथ ही सरकारी वकील ने आगे तर्क दिया कि ऐसे नारों से भड़के असामाजिक तत्वों की हरकतों के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति काफी बिगड़ गई थी. लेकिन, सरकारी वकील ने इस तथ्य पर कोई विवाद नहीं किया कि, जहां ऊपर बताया गया मामला बरेली जिले से संबंधित है, वहीं उसमें जिस आरोपी "नदीम खान" का ज़िक्र है, वह यह अर्जी देने वाला व्यक्ति नहीं है. कोर्ट ने सभी की दलीलों को सुनते हुए आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया.

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Tauseef Alam

तौसीफ आलम पिछले चार सालों से पत्रकारिता के पेशे में हैं. उन्होंने देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. Amar Ujala,Times Now...और पढ़ें

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