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UP News: उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में मवेशी ले जा रहे ट्रकों और उनके ड्राइवरों को निशाना बनाया जा रहा है. ड्राइवरों की मोबाइल लिंचिंग भी की जा रही है. अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कि उत्तर प्रदेश के अंदर एक जिले से दूसरे जिले में मवेशियों को ले जाना अपने आप में कोई जुर्म नहीं है. कोर्ट ने साफ किया कि राज्य की सीमाओं के पार मवेशियों को ले जाना काउ स्लॉटर प्रिवेंशन एक्ट के तहत जुर्म हो सकता है, लेकिन राज्य के अंदर मवेशियों को ले जाना अपने आप में क्रिमिनल ऑफेंस नहीं बनता. साथ ही कोर्ट ने बलिया के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक गाड़ी को सीज किया गया था.
यह मामला बलिया से मऊ जिले में मवेशियों को ले जाते समय एक गाड़ी को सीज करने से जुड़ा था. गाड़ी के मालिक ने एडमिनिस्ट्रेटिव कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. पिटीशनर ने दलील दी कि वह राज्य के अंदर मवेशियों को ले जा रहा था और उसके खिलाफ की गई कार्रवाई कानून के नियमों के खिलाफ थी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने काउ स्लॉटर प्रिवेंशन एक्ट के नियमों का मतलब बताते हुए कहा कि कानून का मकसद गैर-कानूनी तरीके से जानवरों को मारने से रोकना है, न कि कानूनी तरीके से जानवरों को ले जाने को जुर्म बनाना.
कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति उत्तर प्रदेश की सीमा के अंदर मवेशियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जा रहा है, तो सिर्फ़ इस आधार पर गाड़ी ज़ब्त करना सही नहीं हो सकता, जब तक कि दूसरी गैर-कानूनी गतिविधियों के साफ़ सबूत न हों. साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारियों को कानून की सही समझ के साथ काम करना चाहिए. बिना किसी सही आधार के गाड़ी ज़ब्त करना और मालिक को नुकसान पहुंचाना गलत है. इसी आधार पर, हाई कोर्ट ने बलिया के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द कर दिया और गाड़ी को रजिस्टर्ड मालिक को देने का निर्देश दिया.