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Uttar Pradesh News Today: उत्तर प्रदेश सरकार ने 4 मार्च 2021 को अपनी पहचान छिपाकर शादी करने वालों के खिलाफ ठोस कदम उठाते हुए 'लव जिहाद' लागू किया है. इसको लेकर उत्तर प्रदेश में शासन प्रशासन पर अक्सर एकतरफा कार्रवाई के आरोप लगाते रहे हैं. 'लव जिहाद' केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए अहम टिप्पणी की है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार (18 अक्टूबर) को दीवाली की छुट्टी के बावजूद 'लव जिहाद' केस में फंसे अंतरधार्मिक जोड़े के लापता होने के मामले में विशेष सुनवाई की. इस दौरान अलीगढ़ के इगलास थाना पुलिस ने इस जोड़े को अदालत के सामने पेश किया. हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को गैरकानूनी करार देते हुए कहा कि दोनों बालिग (वयस्क) हैं और अपनी मर्जी से जहां चाहें रह सकते हैं.
पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए अदालत ने साफ कहा कि पुलिस ने संविधान के अनुच्छेद 21 यानी जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया है. जस्टिस सलिल कुमार राय और जस्टिस देवेश चंद्र सामंत की हाईकोर्ट की बेंच ने अलीगढ़ पुलिस को फटकार लगाते हुए दोनों जोड़ों को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एसएसपी बरेली को निर्देश दिया कि वह जोड़े के सुरक्षित बरेली पहुंचने की गारंटी लें. वहीं, एसएसपी अलीगढ़ को आदेश दिया गया कि इस पूरे मामले की डीटेल में जांच कर 28 नवंबर तक रिपोर्ट अदालत में पेश करें. उस दिन मामले की अगली सुनवाई होगी और एसएसपी को निजी तौर पर अदालत में मौजूद रहना होगा.
यह मामला तब सुर्खियों में आ गया, जब पुलिस ने 15 अक्टूबर को शान अली और रश्मि नाम के जोड़े को हाईकोर्ट के बाहर से हिरासत में ले लिया. दोनों कोर्ट में की वैधता पर सुनवाई के लिए पहुंचे थे. अदालत के बाहर निकलने के महज कुछ वक्त के बाद वे लापता हो गए. बाद में पता चला कि पुलिस ने उन्हें अलीगढ़ ले जाकर हिरासत रखा है. बताया जा रहा था कि पुलिस ने यह कार्रवाई दबाव में किया था.
पुलिस ने शान अली को थाने में बंद कर दिया और रश्मि को वन स्टॉप सेंटर भेज दिया. 17 अक्टूबर को रश्मि को अलीगढ़ की मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया, जहां उसने साफ कहा कि वह अपनी मर्जी से शान अली के साथ रहना चाहती है और दोनों ने शादी कर ली है. अदालत ने पाया कि वह बालिग है और उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया.
इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर सख्त टिप्पणी की. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जब यह पूछा कि पुलिस ने दो बालिग नागरिकों को हिरासत में क्यों रखा? इस पर सरकारी वकील का तर्क चौंकाने वाला था. सरकारी वकील ने कहा कि 'अंतरधार्मिक शादी की वजह से समाज में तनाव था, इसलिए पुलिस ने सामाजिक दबाव में कार्रवाई की.'
अदालत ने इस तर्क को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए कहा, "सामाजिक दबाव या तनाव के आधार पर किसी नागरिक को हिरासत में रखना असंवैधानिक है. किसी लोकतांत्रिक देश में कानून की सर्वोच्चता होती है, न कि समाज के दबाव की." अदालत ने आदेश दिया कि इस जोड़े को पुलिस सुरक्षा में जहां जाना चाहें वहां पहुंचाया जाए और उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी पुलिस कमिश्नर प्रयागराज, एसएसपी अलीगढ़ और एसएसपी बरेली की होगी.
हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी स्थिति में पुलिस सामाजिक दबाव की वजह से नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकती. अदालत ने स्पष्ट किया कि यह याचिका हैबियस कॉर्पस (Habeas Corpus) की है. यानी किसी शख्स की अवैध हिरासत से मुक्ति के लिए और इसमें शादी की कानूनी वैधता पर विचार नहीं किया जाएगा.
बता दें, मुस्लिम नौजवान शान अली ने रश्मि से प्रेम विवाह किया था. दोनों कानूनी रुप से बालिग है और अपनी मर्जी से साथ में रह रहे थे. बीते 15 अक्टूबर को दोनों हाईकोर्ट में पेश हुए थे, लेकिन उसी दिन सिविल लाइंस इलाके से अचानक लापता हो गए. रश्मि अलीगढ़ के इगलास क्षेत्र की रहने वाली है, जबकि शान अली बरेली के सुभाष नगर थाना क्षेत्र के करगैना इलाके के रहने वाले हैं.
मीडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, रश्मि और शान अली की गुमशुदगी के बाद हड़कंप मच गया. इसी दिन शाम करीब पांच बजे शान अली ने अपने भाई को फोन कर बताया कि वह प्रयागराज के पीवीआर सुभाष चौक के पास ई-रिक्शा में हैं और रश्मि के पिता कुछ लोगों के साथ उसका पीछा कर रहे हैं. इसके कुछ देर बाद शान अली का फोन बंद हो गया.
परिवार ने तुरंत यह बात अदालत को बताई, लेकिन न तो कोई एफआईआर दर्ज की गई और न ही पुलिस ने कोई कार्रवाई की. रश्मि ने पहले भी अदालत में कहा था कि वह अपनी मर्जी से शान अली के साथ रह रही है और परिवार की धमकियों से परेशान है. साल की शुरुआत में हाईकोर्ट ने दोनों को दो महीने की पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया था, लेकिन पुलिस ने आदेश का पालन नहीं किया.
इसकी बजाय पुलिस ने शान अली के परिवार को परेशान करना शुरू कर दिया. पुलिस ने कानून को ताक पर रखकर शान अली और उनके भाई को सितंबर में अवैध रूप से हिरासत में लिया. हालांकि, बाद में अदालत की फटकार के बाद रिहा कर दिया. इस पूरे घटना क्रम के दौरान पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में रही.