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Uttar Pradesh Fake Love Jihad Case: उत्तर प्रदेश पूरे देश में सबसे पहले 'यूपी विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020' कानून लागू करने वाला पहला प्रदेश बना. हालांकि, बीते कुछ सालों में प्रदेश सरकार, पुलिस और बहुसंख्यक समुदाय के लोगों पर लगातार 'धर्मांतरण कानून' का गलत इस्तेमाल करने और मुसलमानों के झूठे केस में फंसाने के आरोप लगते रहे हैं. इसी तरह के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच की तरफ से अहम फैसला सुनाया.
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के जस्टिस अब्दुल मोईन और जस्टिस बबीता रानी की बेंच ने बहराइच जिले के थाना मटेरा में, बीते सितंबर माह में दर्ज अपहरण और धर्म परिवर्तन के मामले की सुनवाई की. इस मौके पर बेंच ने धर्म परिवर्तन कानून के गलत इस्तेमाल पर सरकार को सख्त फटकार लगाई है. अदालत ने एडवोकेट जनरल के माध्यम से सरकार पर नाराजगी जताते हुए न सिर्फ 75 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है बल्कि मुकदमे को रद्द करते हुए आरोपी उमेद उर्फ उबैद को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए.
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपने 20 पेज के फैसले में कई अहम टिप्पणियां की. इस फैसले के बाद पूरे मामले में पर्दे के पीछे से समर्थन करने वाले स्थानीय विधायक को करारा झटका लगा है. यही नहीं इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर चुके जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं. पुलिस और सरकार की मुसलमानों के खिलाफ झूठे केस में फंसाने के आरोपों को बल मिला है.
इस संबंध में जानकारी देते हुए एडवोकेट शेख रियाज़ुद्दीन ने बताया कि 13 सितंबर 2025 को थाना मटेरा क्षेत्र के लालपुर शिवपुर के रहने वाले पंकज कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत में पंकज ने दावा किया था कि उसकी बीवी वंदना ब्यूटी पार्लर चलाती है. शिकायत के मुताबिक, 18 सितंबर को उसकी बीवी को धर्म परिवर्तन कराने के मकसद से उमेद, हमीद, जावेद, मुन्ना और उसकी बीवी वंदना को अपने साथ ले गए.
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसकी बीवी घर से जाते वक्त अपने साथ करीब 5 लाख रुपये नकद और लगभग 40 लाख रुपये के कीमती जेवरात भी लेकर चली गई है. पंकज कुमार ने शिकायत में कहा कि उसकी बीवी का धर्म परिवर्तन करा कर उसे बेच देंगे या पैसों के लालच में उसकी हत्या कर सकते हैं.
पुलिस ने तहरीर के आधार पर एफआईआर नंबर 2025/239 दर्ज की और धारा 140(1) के तहत उमेद सहित करीब आधा दर्जन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया. इसके बाद पुलिस ने उमेद के वालिद मुन्ना को थाने में बुलाकर काफ़ी देर तक पूछताछ की. इसके बाद में आरोपों में बढ़ोतरी करते हुए धारा 316(2), 317(2) बीएनएस के साथ-साथ धारा 5/3 धर्म परिवर्तन विरोधी कानून भी लगा दिया.
बाद में पुलिस ने आरोपी उमेद को 18 सितंबर को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. इसी दिन यानी 18 सितंबर को ही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में इस गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की गई थी. सुनवाई के दौरान जस्टिस अब्दुल मोईन और जस्टिस बबीता रानी ने एडवोकेट जनरल के माध्यम से सरकार को धर्म परिवर्तन कानून के गलत इस्तेमाल पर कड़ी फटकार लगाई. अदालत ने 75 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और मुकदमे को रद्द करते हुए उमेद उर्फ उबैद को तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया.
एडवोकेट शेख रियाज़ुद्दीन ने आगे बताया कि इस मामले की जांच कर रही पुलिस अधिकारी वंदना को हाईकोर्ट ने तलब भी किया था. उन्होंने विभिन्न गवाहों के बयान दर्ज किए थे और उमेद उर्फ उबेद के साथ उसके भाई, बहन और माता-पिता के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की पूरी तैयारी कर ली थी.
इंकलाब में छपी खबर के मुताबिक, हालांकि हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता के जरिये लगाए गए धर्म परिवर्तन के आरोपों को बेबुनियाद पाया और इस कानून का गलत इस्तेमाल करने पर सरकार की निंदा करते हुए सख्त नाराजगी जताई. कोर्ट की फटकार के बाद धर्म परिवर्तन से जुड़े केसेज में पुलिस और सरकार की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं.