Allahabad HC on Sangmarmar Mosque Case: प्रयागराज में संगमरमर मस्जिद को हटाने की कार्रवाई पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है. हालांकि, अदालत ने मस्जिद कमेटी को वैकल्पिक जमीन तलाशने और रेलवे को इसमें मदद करने के निर्देश दिये हैं. मामले पर अगली सुनवाई 15 मई को होगी.
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Prayagraj Sangmarmar Mosque Case: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में रेलवे स्टेशन के पास मौजूद सालों पुरानी "संगमरमर मस्जिद" को हटाने की कार्रवाई पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है. हाई कोर्ट के इस फैसले से मस्जिद इंतजामिया को भले ही कुछ दिनों के लिए राहत मिली है, लेकिन अब उनकी परेशानी और बढ़ गई है.
मिली जानकारी के मुताबिक, सोमवार (5 मई) को संगमरमर मस्जिद इंतजामिया कमेटी की याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुनवाई की. पूरे मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की बेंच ने प्रयागराज जंक्शन के गेट पर मौजूद मस्जिद को गिराने की प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है.
इलहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में अहम निर्देश देते हुए याचिका दायर करने वालों से कहा है कि वे मस्जिद के लिए वैकल्पिक जमीन की तलाश करें. साथ ही रेलवे को भी इस प्रक्रिया में हर मुमकिन मदद करने के निर्देश दिये हैं.
अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक मस्जिद के लिए नई जमीन का इंतजाम नहीं हो जाता है, तब तक वर्तमान स्थिति को जैसा है वैसा ही बनाए रखा जाएगा. यानी न तो मस्जिद को गिराया जाएगा और न ही उसमें किसी तरह का बदलाव किया जाएगा. इस फैसले से मस्जिद इंतजामिया कमेटी को काफी राहत मिली है, लेकिन दूसरी तरफ यह भी साफ हो गया है कि मस्जिद पर यह रोक अस्थायी है और जमीन मिलने के बाद उसे हटाना पड़ेगा.
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दरअसल, प्रयागराज जंक्शन के रेनोवेशन के लिए नॉर्थ सेंट्रल रेलवे की ओर से मस्जिद को हटाने का नोटिस जारी किया गया था. नोटिस की मियाद बीते 27 अप्रैल को खत्म हो गई. इस नोटिस को संगमरम मस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी थी और इस पर रोक लगाने की मांग की थी. इस याचिका पर जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की बेंच ने सुनवाई की.
सुनवाई के दौरान अदालत ने मस्जिद को गिराने की कार्रवाई पर रोक लगाते हुए याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दी. साथ ही अगली सुनवाई तक मौजूदा स्थिति बनाए रखने का स्पष्ट आदेश भी दिया है. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 मई की तारीख तय की है. तब तक रेलवे और मस्जिद कमेटी दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें और तर्क अदालत के सामने रख सकेंगे. इसके बाद अदालत पूरे मामले पर विचार कर आगे का फैसला करेगी.
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