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Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर स्थित नूरी जामा मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला खत्म हो गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया है कि नूरी जामा मस्जिद के खिलाफ कोई बुलडोजर एक्शन या तोड़-फोड़ की कार्रवाई नहीं होगी.
दरअसल, नूरी मस्जिद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ एक याचिका दायर की, जिसमें कहा गया कि नूरी मस्जिद वैध जमीन पर बनाई गई है, लेकिन सरकार इसे अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त करना चाह रही है. याचिका में बताया गया कि नूरी मस्जिद का निर्माण 1839 में हुआ था. साथ ही नूरी मस्जिद को ऐतिहासिक संरचना भी बताया गया है. याचिका में कहा गया कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए नूरी मस्जिद के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करना, मुस्लिम समाज के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है.
इस याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता ने सुनावाई की. याचिका के जवाब में उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में अतिरिक्त महाधिवक्ता पेश हुए.
उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट को यह आश्वासन दिया कि नूरी मस्जिद के खिलाफ कोई तोड़-फोड़ की कार्रवाई नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि नूरी मस्जिद का कुछ हिस्सा रोड की जमीन को अतिक्रमण करके बनाई गई थी. मस्जिद के उस हिस्से को रोड चौड़ीकरण के लिए हटा दिया गया है. उन्होंने कहा कि अब नूरी मस्जिद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी.
सरकार के इस आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब आगे कोई ध्वास्तीकरण की कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है, तो याचिकाकर्ता के अधिकार सुरक्षित माने जाएंगे. हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम समाज में खुशी का माहौल है, मुस्लिम समाज के लोग इस फैसले को अपनी जीत बता रहे हैं.