)
AMU News Today: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) इन दिनों सुर्खियों में है. एएमयू में फीस में बढ़ोतर को लेकर छात्र भूख हड़ताल पर है. इस बीच दिल्ली-एनसीआर के कुछ हिंदू संगठनों के ऐलान यहां पर तनाव बढ़ा दिया है. हिंदू संगठनों ने एएमयू के मुख्य गेट बाब-ए-सैयद पर हनुमान चालीसा पढ़ने का ऐलान किया है. जिसके बाद जिले में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है.
हिंदू संगठनों की घोषणा के बाद अलीगढ़ प्रशासन सतर्क हो गया है और पुलिस ने हालात को नियंत्रण में रखने के लिए सख्त इंतजाम किए हैं. AMU सर्कल और उसके आस-पास के इलाकों में भारी संख्या में रैपिड एक्शन फोर्स और पुलिस बल तैनात किया गया है. हालांकि, इस बीच अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 17 दिनों से जारी धरना और 6 दिन से चल रही भूख हड़ताल को खत्म करने का ऐलान किया है.
थाना सिविल लाइन क्षेत्र में आने वाले एएमयू परिसर के बाहर चप्पे-चप्पे पर पुलिस की नजर है. किसी भी संभावित टकराव या अशांति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है और पूरे एएमयू कैंपस को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. फिलहाल किसी संगठन को हनुमान चालीसा पाठ की इजाजत नहीं दी गई है, लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर हालात पर नजर रखी जा रही है.
गौरतलब हो कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में 15 अगस्त से छात्र भारी भरकम फीस में बढ़ोतरी को लेकर भूख हड़ताल पर थे. एएमयू प्रशासन ने कई कोर्सेज की फीस को 35 फीसदी तक बढ़ा दिया. वहीं, आज मंगलवार (19 अगस्त) को तड़के सुबह फीस बढ़ोतरी और छात्र संघ चुनाव की मांग पर भूख हड़ताल कर रहे छात्रों के पास सुबह 4 बजे वाइस चांसलर प्रो. नईमा खातून पहुंचीं.
मौके पर वाइस चांसलर प्रो. नईमा खातून ने छात्रों की मांग मानते हुए उन्हें जूस पिलाकर अनशन खत्म कराया. उन्होंने छात्रों को आश्वासन दिया गया कि दिसंबर के पहले सप्ताह में छात्र संघ चुनाव होंगे और इसके लिए कमेटी गठित हो चुकी है. इनता ही नहीं उन्होंने छात्रों को आश्वासन दिया कि फीस बढ़ोतरी अधिकतम 10 फीसदी तक सीमित की गई है और अतिरिक्त वसूली गई राशि लौटाई जाएगी. इसके बाद एएमयू प्रशासन अनशन पर बैठे दोनों छात्रों को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया दिया है, जहां उनकी हालत स्थिर है.
वहीं, आज सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की कथित पहली महिला वाइस चांसलर प्रो. नाइमा खातून की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने कहा कि उनके शौहर और उस समय के एक्टिंग वाइस चांसलर प्रो. मोहम्मद गुलरेज़ का सेलेक्शन प्रोसेस में शामिल होना निष्पक्षता पर संदेह पैदा करता है.
यह याचिका प्रो. मुज़फ्फर उरूज रब्बानी और फैजान मुस्तफा ने दायर की थी. दोनों याचिकाकर्ताओं की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दो निर्णायक वोटों पर आपत्ति जताई. अदालत ने टिप्पणी की कि प्रक्रिया सिर्फ सही नहीं होनी चाहिए बल्कि सही दिखनी भी चाहिए. जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने खुद को सुनवाई से अलग करने की पेशकश की, जिसके बाद CJI ने मामला नई बेंच को सौंपने का आदेश दिया.