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Anees fatima biography: बिहार विधानभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. नामांकन प्रक्रिया और चुनाव प्रचार त्यौहारों के बीच बड़े ज़ोरो शोरों से चल रहा है. ऐसे में आज उन लोगों को याद किया जा रहा है, जिन्होंने बिहार के लिए बहुत सारे योगदान दिए है. इन्हीं में से एक मुस्लिम महिला अनीसा फातिमा हैं, जो बिहार की पहली खातून विधायक बनी थी. वह भाषण देने में इतनी माहिर थीं कि उन्हें लेडी इमाम के खिताब से भी नवाज़ा जा चुका था. वो पेशे से एक टीचर भी थी, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ तहरीके आज़ादी में पूरे जोश-ओ- खरोश से के साथ शिरकत की थी.
अनीस फातिमा की पैदाईश 1901 में पटना में हुई थी, ऐसे वक्त में जब महिलाओं की शिक्षा और अवामी ज़िंदगी में हिस्सेदारी बेहद कम थी. तब अनीस फातिमा की प्रारंभिक शिक्षा बदशाह नवाज रिज़वी स्कूल (मदरसा इस्लामिया) से पूरी हुई थी. बचपन से ही उनका तेज दिमाग और निडर स्वभाव उन्हें खास बनाता था, जो बाद में भारत की स्वतंत्रता संग्राम और उनकी सियासी यात्रा में उनकी पहचान बन गयी.
आज़ाद उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था पहला चुनाव
लेडी इमाम ने 1937 में आज़ाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. वो बिहार से चुनी गईं पहली महिला विधायक बनीं. वो अंजुमन तहरीक- ए-उर्दू संगठन की एक्टिव मेंबर थीं, जिसने बिहार में उर्दू को दूसरी भाषा का दर्जा दिलाने के लिए मुहिम चलाया था. देश की आजादी के बाद भी उन्होंने बिहार में एजुकेशन के लिए खूब काम किया और वो खुदा बख्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी से जुड़ी रहीं.
जंगे आज़ादी में अहम क़िरदार
1920 में महात्मा गांधी के ज़रिए शुरू किए गए असहयोग आंदोलन में अनीस फातिमा ने अहम रोल अदा किया. पटना में शराब की दुकानों के खिलाफ उन्होंने निडर होकर विरोध-प्रदर्शन किए, जो उस वक्त एक महिला के लिए साहसिक कदम था. उनकी प्रभावशाली भाषण कला और लीडरशिप स्किल ने कौमी सतह पर उन्हे अहम पहचान दिलाई. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने उन्हें मोंटैगू-चेल्म्सफोर्ड सुधारों के विरोध में इंग्लैंड भेजी गई प्रतिनिधि मंडली में शामिल किया, जो उस वक्त एक मुस्लिम महिला के लिए शानदार कामयाबी थी.
1930 के नागरिक अवज्ञा आंदोलन में भी उन्होंने और गौरी दास ने पटना में तीन हजार से ज्यादा महिलाओं की जुलूस का नेतृत्व किया. ब्रिटिश सरकार के ज़रिए उन पर ₹201 का जुर्माना लगाया गया, जिसे उन्होंने न मानकर स्वतंत्रता संग्राम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई.
अनीस फातिमा को जदीद बिहार या नया बिहार की नींव रखने वालों में से एक माना जाता है. अनीस फातिमा की शादी सर सैयद अली इमाम से हुई थी. ब्रिटिश हुकूमत के दौरान जब बाल विवाह, पर्दा प्रथा जैसी सामाजिक बुराई खूब प्रचलन में थीं, अनीस फातिमा ने उस वक्त इसके खिलाफ आवाज उठाई थी.