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AR Rahman News Today: हिंदुस्तानी सिने जगत में ए आर रहमान का शुमार महान संगीतकारों में होता है. ए आर रहमान अब तक दो हजार से ज्यादा गानों को कंपोज कर चुके हैं, जबकि अपनी खूबसूरत से आवाज के बलबूते सैकड़ों गानों को अमर बना चुके हैं. फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' का बैकग्राउंड स्कोर और थीम म्यूजिक कंपोज करने और इसी फिल्म के 'जय हो' गाने के लिए ऑस्कर अवार्ड भी जीत चुके हैं.
इस मुकाम तक पहुंचने के लिए ए आर रहमान ने कड़ी मेहनत की है. हिंदुस्तान टॉप म्यूजिक कंपोजर हालिया दिनों एक इंटरव्यू के दौरान किए गए दावे ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया. दरअसल, हिंदी फिल्मों में अपने तमिल गानों को सटीक और वर्ल्ड बाई वर्ल्ड ट्रांसलेट न कर पाने को लेकर शर्मिंदगी का इजहार किया है.
एनडीटीवी के एक प्रोग्राम में एक्ट्रेस श्रुति हासन से बातचीत के दौरान रहमान ने यह खुलासा किया है. इस इंटरव्यू के दौरान ए आर रहमान ने कहा, "मुझे लगता है कि हर भाषा का एक खास प्रभाव और आकर्षण होता है. जब मेरी फिल्में जैसे 'दिले से' और 'रोजा' कामयाब हुईं, तब लोग तमिल गानों के हिंदी में शाब्दिक अनुवाद करने लगे." उन्होंने कहा, "जब मेरे कुछ गानों पर लोग कहते थे कि यह हिंदी गीत के बोल बेकार हैं, मैं तो तमिल संस्करण सुनना ही पसंद करूंगा, जिसे सुनकर मुझे काफी शर्मिंदगी हुई."
ए आर रहमान ने आगे बताया कि यह परेशानी उस दौर में हुई, जब बॉक्स ऑफिस पर फिल्मों की कामयाबी तीन भाषाओं में मापी जाने लगी. उन्होंने कहा, "लोग सिर्फ पैसे देखकर काम कर रहे थे. यही वजह थी कि मैंने डब्ड फिल्मों के साथ हिंदी-ओरिएंटेड फिल्में बनाने पर ध्यान देना शुरू कर दिया."
ऑस्कर विजेता ए आर रहमान ने कहा कि उन्हें यह समझने में लगभग दस साल लगे कि अपने गानों में आत्मीयता और आकर्षण बनाएं रखने के लिए अलग-अलग भाषाओं का सीखना कितना जरुरी है. उन्होंने दूसरी भाषाओं को सीखने को लेकर रोचक खुलासा किया है. रहमान ने कहा, "मैं अपने पवित्र ग्रंथ कुरआन से थोड़ी अरबी सीखी. 1994 से 1997 तक मैंने कुरान शरीफ को पढ़ने और सीखने में लगाया."
रहमान ने कहा, "यह रूहानी सफर न सिर्फ उर्दू सीखने में मददगार साबित हुई बल्कि हिंदी को भी समझने और बेहतर बनाने में मददगार साबित हुआ." रहमान ने बताया, "जब मैं सुभाष घई से मिला तो उन्होंने कहा कि आप एक महान संगीतकार हैं, लेकिन हिंदी सीखे बिना आप टिक नहीं पाएंगे." उन्होंने कहा, "मैंने इसे एक बेहतरीन सलाह मानी और गंभीरता से हिंदी और उर्दू सीखना शुरू कर दिया. हिंदी भाषी दर्शकों का प्यार अद्भुत है. इसके अलावा मुझे पंजाबी भी बहुत पसंद है."
यह पहली बार नहीं है, जब ए आर रहमान गानों के ट्रांसलेटेड वर्जन पर नाराजगी जता चुके हैं, इससे पहले भी वह गानों के रीमेक्स बनने पर नाराजगी का इजहार कर चुके हैं. रहमान ने कि आप सोच भी नहीं सकते हैं कि लोग बिना इजाजत के किसी के काम को कैसे इस्तेमाल करते हैं.
बता दें, ए आर रहमान का पूरा नाम अल्लाह रक्खा रहमान है. उनका जन्म 6 जनवरी 1967 को चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ. इस्लाम धर्म अपनाने से पहले ए आर रहमान का नाम ए.एस. दिलीप कुमार था. उन्होंने अपने करियर की शुरूआत तमिल सिनेमा से की थी. 'रोजा' फिल्म ने ए आर रहमान को दुनियाभर में पहचान दिलाई.
रहमान ने हिंदी इंडस्ट्री में बॉलीवुड के मशहूर डॉयरेक्टर राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'रंगीला' (1995) से डेब्यू किया था. उनके करियर में सुभाष घई की फिल्म 'ताल' (1999) मील का पत्थर साबित हुई. ए आर रहमान अब तक 100 से ज्यादा फिल्मों के लिए दो हजार से ज्यादा गाने लिख चुके हैं.