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Waqf amendment act: वक्फ संशोधन कानून पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम फैसले के बाद मुस्लिम समुदाय लोगों में जश्न का माहौल है. मुस्लिम रहनुमा, उलमा-ए-कराम, मुस्लिम संगठन और आम लोग इस फैसले को त्योहार के रूप में सेलिब्रेट कर रहे हैं. इसी कड़ी में जमीयत उलमा ए हिंद के सदर मौलाना अरशद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है. साथ ही इस कानून के खिलाफ आगे की कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है.
जमीयत उलमा ए हिंद के सदर अरशद मदनी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट कर सुप्रीम कोर्ट द्वारा वक्फ संशोधन कानून पर दिए फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम समुदाय के लिए राहत बताया है. अरशद मदनी ने अपने पोस्ट में लिखा है कि वक्फ संशोधन कानून के तीन विवादित धाराओं पर मिली अंतरिम राहत के फैसले का जमीयत उलमा ए हिंद स्वागत करती है.
काले कानून के खिलाफ लड़ाई रहेगी जारी- अरशद मदनी
उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आगे लिखा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला हमारी उस उम्मीद को यक़ीन में बदल दिया है कि इंसाफ़ अभी ज़िंदा है. उन्होंने आगे लिखा कि जमीयत उलमा ए हिंद इस काले कानून (वक्फ संशोधन कानून) के खत्म होने तक अपनी कानूनी और लोकतांत्रिक जद्दो-जहद जारी रखेगी.
मुसलमानों की मजहबी आज़ादी छिनने की है साजिश- अरशद मदनी
अरशद मदनी ने वक्फ संशोधन कानून को भारत की संविधान पर सीधा हमला बताया है. उन्होंने कहा कि भारत का संविधान नागरिकों और अल्पसंख्यकों को न सिर्फ समान अधिकार देता है बल्कि उन्हें पूरी धार्मिक आज़ादी भी देता है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि यह कानून मुसलमानों की मज़हबी आज़ादी छीन लेने की साजिश है. उन्होंने इस कानून को संविधान विरोधी और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ खतरनाक साजिश बताया है.
सुप्रीम कोर्ट से है पूर्ण न्याय की उम्मीद- अरशद मदनी
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की न्याय पर भरोसा जताते हुए कहा कि जमीयत उलमा ए हिंद ने वक्फ संशोधन कानून 2025 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. उन्होंने आगे कहा कि हमें यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट इस काले कानून को समाप्त करके हमें पूर्ण संवैधानिक न्याय देगा.