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Arunachal Pradesh: संजौली के बाद कैपिटल मस्जिद को हटाने पर अड़े दक्षिणपंथी संगठन, किया बंद का ऐलान

Right Wing outfits Bandh Called in Arunachal Pradesh: अरुणाचल प्रदेश में नाहरलागुन की कैपिटल जामा मस्जिद को हटाने की मांग पर दक्षिणपंथी संगठन 12 घंटे का बंद बुला रहे हैं. पुलिस ने बंद को अवैध घोषित कर सुरक्षा बढ़ा दी है. संजौली मस्जिद विवाद की तरह यह मामला भी सांप्रदायिक तनाव का कारण बन रहा है.

संजौली की तर्ज पर कैपिटल जामा मस्जिद दक्षिणपंथियों के राडार पर
संजौली की तर्ज पर कैपिटल जामा मस्जिद दक्षिणपंथियों के राडार पर

Arunachal Pradesh News Today: उत्तर भारत के बाद उत्तर पूर्व के राज्यों में भी मुसलमानों के खिलाफ हिंसा और नफरत की घटनाएं बढ़ने लगी है. असम में हालिया दिनों कई जगहों पर सरकार और बहुसंख्यक समुदाय के लोगों का मुस्लिमों के खिलाफ नफरत देखने को मिली. दक्षिणपंथी संगठनों की लगाई यह आग अब पहाड़ी राज्य अरुणाचल प्रदेश तक पहुंच गई है. यहां पर कई दक्षिणपंथी संगठन लगातार मुसलमानों के खिलाफ नफरती और आपत्तिजनक बयान दे रहे हैं और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

हिमाचल प्रदेश के संजौली मस्जिद की तरह अरुणाचल प्रदेश के कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने मुस्जिद को हटाने को लेकर विरोध शुरू कर दिया है. मंगलवार (9 दिसंबर) को अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में भी तनावपूर्ण माहौल देखने को मिला. राजधानी क्षेत्र में तीन नौजवानों ने अपने-अपने संगठनों के बैनर तले 9 दिसंबर को 12 घंटे का 'बंद' बुलाया है. यह बंद अल्पसंख्यकों के खिलाफ बुलाई गई है. अरुणाचल प्रदेश इंडिजिनस यूथ ऑर्गनाइजेशन (APIYO) नाम के संगठन के अध्यक्ष की एक विवादास्पद वीडियो भी वायरल हुई थी, जिसमें वह मस्जिद में घुसकर इमाम और अन्य लोगों को धमकाते हुए दिखाई पड़ा था. 

राजधानी समेत पूरे प्रदेश में पुलिस अलर्ट

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दक्षिणपंथी संगठनों के बंद के ऐलान को देखते हुए अरुणाचल प्रदेश पुलिस अलर्ट मोड पर आ गई है और पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था टाइट कर दी है. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शांति भंग न करने की चेतावनी दी है. पुलिस मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IGP) चुखू आपा ने साफ कहा कि बंद को अवैध घोषित किया गया है और किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था खराब करने की कोशिश पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

IGP चुखू आपा ने कहा, "बंद को अवैध और गैरकानूनी घोषित किया गया है. सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. अगर कोई भी व्यक्ति लोगों की आवाजाही रोकने या कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करेगा तो सख्त कदम उठाए जाएंगे."

जिला प्रशासन पहले ही बंद को अवैध घोषित कर चुका है और लोगों से अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रखने की अपील की है.
कई सामुदायिक संगठनों और सिविल सोसाइटी समूहों ने भी बंद के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है, खासकर चुनावी अवधि और लोगों की परेशानियों को देखते हुए.

कौन बुला रहा है बंद और क्या है मांगे?

यह बंद तीन संगठनों के जरिये संयुक्त रूप से बुलाया गया है. इनमें इंडिजिनस यूथ फोर्स ऑफ अरुणाचल (IYFA), अरुणाचल प्रदेश इंडिजिनस यूथ ऑर्गनाइजेशन (APIYO) और ऑल नाहरलागुन यूथ ऑर्गनाइजेशन (ANYO) शामिल है. यह तीनों समूह कट्टरपंथी और दक्षिणपंथी विचारधारा से प्रभावित है. इन तीन ग्रुप्स की मांग है कि नाहरलागुन के निगम कॉलोनी स्थित कैपिटल जामा मस्जिद को हटाया जाए. इसके अलावा राजधानी क्षेत्र में साप्ताहिक बाजारों पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए और अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को वापस भेजा जा.

इन संगठनों ने 25 नवंबर को भी बंद बुलाने की घोषणा की थी, लेकिन प्रशासन की बातचीत के प्रस्ताव के बाद इसे टाल दिया गया था. हालांकि 5 दिसंबर को गृहमंत्री के साथ होने वाली बैठक चुनाव अभियान में व्यस्तता के चलते नहीं हो पाई, जिसके बाद अब 9 दिसंबर के बंद को लागू करने का फैसला कर लिया गया है.

तारो सोनम लियाक ने फिर दी धमकी

APIYO के अध्यक्ष तारो सोनम लियाक ने कहा कि अब बंद को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा और सामुदायिक संगठनों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्ट यूनियनों और आम जनता से समर्थन की अपील की है. तारो सोनम लियाक ने धमकी देते हुए कहा कि बंद के दौरान अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होगी.

संजौली की तर्ज पर नाहरलागुन में जामा मस्जिद को हटाने की मांग 

बता दें, हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली में स्थित सालों पुरानी एक मस्जिद को लेकर हिंदूवादी संगठन लगातार विरोध कर रहे हैं. हिंदू संगठन इसे अवैध निर्माण बताते हुए तोड़ने और जुमे की नमाज रोकने की मांग कर रहे हैं. निचली अदालत ने ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था, जिसके तहत ऊपरी मंजिलें गिरा दी गईं. मुस्लिम पक्ष, वक्फ बोर्ड और ऑल हिमाचल मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी का दावा है कि मस्जिद 1915 से रिकॉर्ड में दर्ज है और 100 साल से ज्यादा पुरानी है. 

मामला हाईकोर्ट में लंबित है और निचली दो मंजिलों पर स्टे जारी है. इसके बावजूद हिंदूवादी संगठन हर रोज नमाजियों के सामने अवरोध खड़ा करते हैं और हंगामा करते हैं. हालिया दिनों हिंदूवादी संगठन से जुड़ी कुछ औरतों ने मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ने से रोक दिया और मौके पर जमकर हंगामा किया था. तनाव को देखते हुए पुलिस तैनात है और अगले आदेश तक स्थिति संवेदनशील बनी हुई है. हालांकि, इसके बावजूद हिंदूवादी संगठन विरोध प्रदर्शन कर शासन प्रशासन पर मस्जिद को हटाने के लिए दबाव बना रहे हैं. 

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