Advertisement
trendingNow,recommendedStories0/zeesalaam/zeesalaam3034321
Zee SalaamIndian Muslimवफादारी का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए..., वंदे मातरम् पर फायर हो गए ओवैसी; बीजेपी को घेरा

'वफादारी का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए...', वंदे मातरम् पर फायर हो गए ओवैसी; बीजेपी को घेरा

Asaduddin Owaisi Vande Mataram Speech: वंदे मातरम की 150वीं सालगिरह पर लोकसभा में चर्चा के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि राष्ट्रवाद को किसी भी धर्म या धार्मिक प्रतीक से जोड़ना संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है और समाज में बेवजह बंटवारा पैदा करता है.

'वफादारी का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए...', वंदे मातरम् पर फायर हो गए ओवैसी; बीजेपी को घेरा

Asaduddin Owaisi on Vande Mataram: राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर लोकसभा में एक खास चर्चा हुई. इस चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने अपने विचार रखे. इस कड़ी में AIMIM चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार और सत्ताधारी पार्टी की विचारधारा पर जोरदार हमला किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद को किसी एक मजहब, देवी-देवता या धार्मिक रीति-रिवाज से जोड़ना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है और देश में सामाजिक बंटवारे को गहरा करता है.

ओवैसी ने कहा कि भारतीय संविधान किसी एक धार्मिक पहचान से शुरू नहीं होता, बल्कि "हम भारत के लोग" शब्दों से शुरू होता है. उन्होंने प्रस्तावना में निहित विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, आस्था और पूजा की स्वतंत्रता को लोकतंत्र की आत्मा बताया. उन्होंने कहा कि संविधान किसी भी नागरिक को किसी देवी या देवता का नाम लेकर अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए मजबूर नहीं करता है.

'वफादारी की कसौटी पर नहीं किया जा सकता है इस्तेमाल'
ओवैसी ने संविधान सभा की बहसों का हवाला देते हुए कहा कि वंदे मातरम के संबंध में संशोधनों पर विचार किया गया था, लेकिन देश की प्रस्तावना की शुरुआत किसी देवी के नाम से करने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम एक सम्मानित राष्ट्रीय गीत है, लेकिन इसे किसी नागरिक की वफादारी की कसौटी के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

Add Zee News as a Preferred Source

'लोगों की पहचान हो जाएगी सीमित'
AIMIM चीफ और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अदालतों ने भी किसी भी नागरिक पर राष्ट्रगान या राष्ट्रीय गीत थोपना गलत माना है. उन्होंने कहा, “देशभक्ति एक भावना है, कोई धार्मिक रीति-रिवाज नहीं. इसे किसी एक पहचान की सीमाओं तक सीमित नहीं किया जा सकता.” साथ ही उन्होंने मुस्लिम, हिंदू, सिख और अन्य समुदायों के स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र करते हुए कहा कि देश की आजादी किसी एक समुदाय का योगदान नहीं था और इसलिए, राष्ट्रवाद किसी एक समूह का एकाधिकार नहीं हो सकता.

'सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं है'
अपने स्पीच के आखिर में ओवैसी ने कहा कि सच्ची देशभक्ति गरीबी खत्म करने, न्याय सुनिश्चित करने और समानता स्थापित करने में है, न कि गानों या रीति-रिवाजों के ज़रिए किसी पर वफादारी थोपने में. उन्होंने साफ किया कि धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आस्था संविधान द्वारा सुरक्षित हैं और किसी भी नागरिक को किसी धार्मिक प्रतीक के आधार पर राष्ट्रवाद स्वीकार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. साथ ही उन्होंने टैगोर के विचारों का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय राष्ट्रवाद समावेशी होना चाहिए. एक ऐसा राष्ट्रवाद जिसमें सभी समुदायों को समान स्थान मिले.

About the Author
author img
Tauseef Alam

तौसीफ आलम पिछले चार सालों से पत्रकारिता के पेशे में हैं. उन्होंने देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है. Amar Ujala,Times Now...और पढ़ें

TAGS

Trending news