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Assam News Today: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर विरोधी पार्टियां लगातार अल्पसंख्यक विरोधी बयान देने का आरोप लगाती रही हैं. हिमंता बिस्वा सरमा के बयान और बीजेपी के हालिया दिनों सोशल मीडिया पर जारी विज्ञापन ने उनके सांप्रदायिक और धुव्रीकरण सोच को उजागर करने का काम किया. जिस पर सर्वोच्च न्यायिक संस्था ने कड़ी फटकार लगाई थी.
हालिया कुछ माह में असम सरकार ने बड़ी संख्या में मुस्लिम बाहुल इलाकों में बुलडोजर कार्रवाई की और फिर कई लोगों को विदेशी करार देते हुए नो मैंस लैंड में पुशबैक कर दिया. शनिवार (2 नवंबर) को भी 16 लोगों को घुसपैठ के आरोप में गिरफ्तार किया गया. इसकी जानकारी खुद सोशल मीडिया पर हिमंता बिस्वा सरमा ने दिया.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) इसकी जानकारी देते हुए एक समुदाय विशेष को निशाना बनाया. हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी पोस्ट में लिखा, "मियाभाई की डेयरिंग असम में नहीं चलेगी." सरमा ने आगे लिखा कि बांग्लादेश से 16 अवैध प्रवासी असम में घुस आए थे, जिनके इरादे गलत थे, लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया और कार्रवाई की गई.
'Miyabhai Ki Daring' won't work in Assam!
16 illegal migrants from Bangladesh entered Assam with nefarious intentions and faced the consequences.
We will find you, catch you and deport you. Kudos to @sribhumipolice. pic.twitter.com/T8kIhNq0hK
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) November 1, 2025
हिमंता बिस्वा सरमा ने सख्त लहजे में कहा, "हम आपको ढूंढ निकालेंगे, पकड़ेंगे और देश से बाहर भेज देंगे." उन्होंने इस कार्रवाई में शामिल अधिकारियों की तारीफ की. हिमंता बिस्वा सरमा और बीजेपी शासित राज्यों में विदेशी बताकर देश से बाहर भेजने को लेकर मानवाधिकार संगठन सवाल खड़े करते रहे हैं. इसको लेकर कोर्ट ने भी बीते दिनों बांग्लादेशी बताकर सरहद पार धकेलने पर कड़ी चेतावनी दी थी.
असम में 2025 की शुरुआत से हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने 'पुशबैक' नीति के तहत मुख्य रूप से रोहिंग्या शरणार्थी और बंगाली मुस्लिम को बिना पूर्ण कानूनी प्रक्रिया के सीमा से बाहर कर दिया. यह नीति फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के आधार पर लागू की गई, जिसमें 63 घोषित विदेशियों के निर्वासन की बात कही गई थी. हालांकि, कई मामलों में अदालत में अपील लंबित रहने के बावजूद लोगों को कानून को ताक पर रखकर बॉर्डर पर धकेल दिया गया.
हिमंता बिस्वा सरमा ने जून 2025 तक 330 से ज्यादा लोगों को बॉर्डर से बाहर भेजे जाने की पुष्टि की. वहीं, कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कई मामलों में हस्तक्षेप किया. गुहावटी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत याचिकाओं के आधार पर कुछ लोगों को वापस लाने के आदेश दिए.
बीते मई 2025 में 65 लोगों को पुशबैक किया गया था, लेकिन बांग्लादेश ने नागरिकता साबित न होने पर इन्हें अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद हाई कोर्ट के नोटिस पर बीएसएफ ने इन्हें वापस ले आई. इसके अलावा 7 लोगों (खैरुल इस्लाम समूह) को सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील के दस्तावेज दिखाने पर जून 2025 में वापस लाया गया. अबू बक्कर सिद्दीक, अकबर अली और दोयजन बीबी जैसे मामलों में भी कोर्ट ने हस्तक्षेप किया.