)
Assam CM on Muslim Population: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने देश में मुस्लिम आबादी में हुई बढ़ोतरी पर केंद्रीय गृह मंत्री के बयान को हाईलाइट करते हुए कहा कि यह इजाफा केवल आंतरिक जनसंख्या वृद्धि के कारण नहीं, बल्कि इमिग्रेशन की वजह से भी हुआ है. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार "डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट" (पहचानो, हटाओ और निर्वासित करो) के मकसद से एक Demography Mission का प्लान कर रही है.
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि असम पॉप्युलेशन में बदलावों का बड़ा शिकार रहा है. उन्होंने बताया कि राज्य में मुस्लिम आबादी 39.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि माजुली जिले में मुस्लिम जनसंख्या में 100 फीसद तक इजाफा हुआ है. सरमा ने कहा कि असमिया मुसलमानों और बाहरी मुसलमानों में फर्क है.
उन्होंने कहा,"केंद्रीय गृह मंत्री ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक भाषण दिया. उन्होंने कहा कि देशभर में मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है. यह वृद्धि केवल देश के अंदर नहीं हुई, बल्कि विदेशी नागरिकों के आने से भी हुई है. इसी वजह से केंद्र सरकार एक जनसांख्यिकीय मिशन चलाना चाहती है, जिसका मकसद पहचानना, हटाना और निर्वासित करना होगा.
उन्होंने आगे कहा,"पहली बार केंद्र सरकार ने इस मामले पर इतनी सफाई से बात की है. असम की जनसंख्या में बदलावों का बड़ा शिकार रहा है. 2021 में असम में मुस्लिम आबादी 38 प्रतिशत से अधिक हो गई थी. जब अगली जनगणना होगी, तब यह 39.5 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी. यहां तक कि माजुली में भी मुस्लिम आबादी 100 प्रतिशत बढ़ी है. हालांकि असमिया मुसलमानों की आबादी में इजाफा सामान्य दर से हुआ है. लेकिन अगर माजुली में मुस्लिम जनसंख्या में 100 फीसद इजाफा हुआ है, तो आप समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगा सकते हैं."
सरमा ने राज्य में बदलती जनसांख्यिकीय स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि 2011 की जनगणना के अनुमानों के मुताबिक, असम में मुस्लिम आबादी 40 प्रतिशत, ईसाई आबादी 6-7 फीसद और हिंदू आबादी 40 प्रतिशत से अधिक नहीं है. उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत करेंगे.
उन्होंने कहा, "अगर हम मुस्लिम आबादी को 40 फीसद, ईसाई आबादी को 6-7 प्रतिशत मानें, तो हिंदू आबादी 40 प्रतिशत से अधिक नहीं है. यह 2011 की अनुमान रिपोर्ट पर आधारित है. यह चिंता का विषय है और हम सभी इसके प्रति चिंतित हैं.
दरअसल सोमवार को गृह मंत्री अमित शाह ने कई जनगणनाओं के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा था कि घुसपैठ (infiltration) ने दशकों में देश की जनसंख्या संरचना को प्रभावित किया है. अमित शाह ने कहा, "आज घुसपैठ, जनसांख्यिकीय परिवर्तन और लोकतंत्र- ये तीनों मौज़ू एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, जब तक हर भारतीय इन मुद्दों को नहीं समझेगा, तब तक हम अपने देश, संस्कृति, भाषाओं और स्वतंत्रता की रक्षा नहीं कर सकते."