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Assam News: असम के नलबाड़ी जिले के बड़कुरा गांव के इंडीजीनस (स्वदेशी) मुस्लिम गोरिया समुदाय के एक महिला सकीना बेगम को बांग्लादेश भेज दिया गया है. दरअसल, कुछ दिन पहले ही असम पुलिस ने सकीना बेगम को उनके घर वाले से यह कहकर ले गए थे कि सकीना को थाने में जाकर एक हस्ताक्षर करना होगा. पुलिस के कहने पर शकीना के घर वालों ने थाने जाने दिया. सकीना बेगम पर एक फॉरेनर का केस चल रहा था. लेकिन सकीना बेगम से बिना इंक्वारी किए, बांग्लादेश में पुश बैक कर दिया गया. यानी बांग्लादेश भेज दिया गया, जबकि मुस्लिम गोरिया समुदाय को असम की सरकार ने इंडीजीनस (स्वदेशी) घोषित किया है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने यह फैसला किया है कि असम में किसी भी व्यक्ति के ऊपर बांग्लादेशी होने का संदेह हो तो उन्हें डिटेंशन कैंप में रखना नहीं है, बल्कि सीधे ही पुश बैक करने का आदेश है.
असम में इंडीजीनस गोरिया मुस्लिम समुदाय को जबरन पुश बैक अभियान के तहत बांग्लादेश के बॉर्डर के अंदर धकेला जा रहा है. इन घटनाओं को लेकर असम के इंडीजीनस मुस्लिम ऑर्गेनाइजेशन शैडो असम गोरिया जातीय परिषद के प्रमुख लीडर एडवोकेट मीर आरिफ इकबाल हुसैन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि असम की सरकार ने गोरिया मुस्लिम समुदाय को इंडीजीनस मुस्लिम घोषित किया है. उन्होंने कहा कि हमारे असम के नलबाड़ी के एक इंडीजीनस महिला जिसका नाम शकीना बेगम है उन्हें बांग्लादेशी के महिला करार देकर पुश बैक किया गया है.
एडवोकेट मीर आरिफ इकबाल हुसैन ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि असम सरकार से हमारी मांग है कि शकीना बेगम को जल्द से जल्द भारत सरकार और असम सरकार भारत में ले आए. उन्होंने कहा कि सकीना बेगम एक इंडीजीनस मुस्लिम है और अभी बांग्लादेश में बहुत ही खराब स्थिति में है. उन्होंने कहा कि सकीना को बांग्लादेश की पुलिस गिरफ्तार कर लेगी, क्योंकि वह बांग्लादेश की नागरिक नहीं है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक शकीना बेगम के घर वाले इंडीजीनस गोरिया समुदाय के मुसलमान हैं, जो शुद्ध से बांग्ला भाषा बोल भी नहीं पाते हैं, लेकिन सकीना को बांग्लादेशी बोलकर पूश बैक कर दिया गया.