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Nagaon News Today: असम में बांग्ला भाषा मुसलमान बीजेपी की अगुवाई वाली हिमंता बिस्वा सरमा सरकार के निशाने पर हैं. हालिया दिनों में घुसपैठ के नाम पर कई मुस्लिम परिवारों को बॉर्डर पर पुशबैक कर दिया गया, जबकि कई इलाकों में सालों से रहे मुस्लिम बाहुल इलाकों में बुलडोजर कार्रवाई की गई. बीते दिनों बीजेपी ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल पर विवादित वीडियो शेयर करते हुए मुसलमानों को घुसपैठिया और पूरे असम पर कब्जा करते हुए दिखाया.
हालिया दिनों संविधान के जरिये दिए गए शरीया कानून को नजर अंदाज कर पॉलीगैमी बिल पारित किया. विपक्ष और मुस्लिम समुदाय के लोग हिमंता सरकार के धुव्रीकरण की सियासत करार दे रहे हैं. इस बीच शनिवार (29 नवंबर) को दक्षिणपंथी सरकार ने असम के नगांव (Nagaon) जिले में हजारों परिवारों को बेघर कर दिया. प्रभावितों में ज्यादतर मुस्लिम समुयाद के लोग हैं. आलम यह है कि नवंबर की इस कड़कड़ती ठंड में कई परिवारों के पास सिर छिपाने की जगह तक नहीं है.
हिमंता बिस्वा सरकार का दावा है कि नगांव जिले में जहां पर बुलडोजर की कार्रवाई की गई है, वह सब सरकारी और विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा था. इस अभियान का असर लगभग 1,700 परिवारों पर पड़ा, जो इस जमीन पर बसे हुए थे. अधिकारियों के मुताबिक, जिस इलाके को खाली कराया जा रहा है, वह कुल 795 हेक्टेयर सरकारी और वन विभाग की जमीन है. एक तरफा कार्रवाई और मुस्लिम बाहुल इलाकों को निशाना बनाने को लेकर हिमंता बिस्वा सरमा सरकार पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं.
यह अभियान लुटिमारी क्षेत्र में सुबह शुरू हुआ और मौके पर भारी संख्या में मौजूद सुरक्षा बलों के बीच शाम 4 बजे तक चला. अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान इतवार को भी जारी रहेगा. इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के मुताबिक, प्रशासन के जरिये 3 महीने पहले नोटिस जारी कर इन परिवारों से 2 महीने के भीतर इलाका खाली करने को कहा गया था. इसके बाद यहां के लोगों ने एक महीने की और मोहलत मांगी थी, जिसे प्रशासने ने स्वीकार भी कर लिया था.
अधिकारियों के मुताबिक, अतिक्रमण हटाने की इस बड़ी कार्रवाई से पहले ही 1,100 से ज्यादा परिवार मजबूरी में अपना घर छोड़ चुके थे. सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बीच प्रशासन ने इन घरों को चिह्नित कर ढहाना शुरू कर दिया. नगांव जिले में चल रहे इस अभियान में कुल 2,070 कच्चे मकान और 192 पक्के मकान ध्वस्त किए गए हैं. इनके साथ ही सरकारी सुविधाओं को भी हटाया गया है, जिनमें 7 आंगनवाड़ी केंद्र, 2 लोअर प्राइमरी स्कूल, एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 'जल जीवन मिशन' से जुड़ी वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट भी शामिल है.
इसके बावजूद अधिकारियों का दावा है कि गांवों के 70 फीसदी से ज्यादा लोग अपनी मर्जी से अपना सामान लेकर पहले ही क्षेत्र छोड़ चुके थे. जिला आयुक्त देवाशीष शर्मा ने कहा कि नोटिस दिए जाने के बाद लोगों को तीन महीने समय दिया गया था, जिसमें एक माह का अतिरिक्त समय भी दिया गया था. यह पूरा अभियान ग्रेटर लुटुमारी फॉरेस्ट रिजर्व क्षेत्र के बेडेतीपर, संघुला, जुरिरपार और केंदापाड़ा गांवों में चल रहा है. प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए लगभग 50 बुलडोजर तैनात किए हैं और इतवार को भी यह कार्रवाई जारी रहने की संभावना है. इस कार्रवाई से स्थानीय लोग दहशत में हैं.
कई प्रभावित परिवारों का दावा है कि वे पिछले 40 साल से ज्यादा वक्त से इस इलाके में रह रहे हैं. उनका कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि यह जमीन वन विभाग की है. लोगों का आरोप है कि अचानक की गई बेदखली से वे बेघर हो गए हैं और उनके सामने जिंदगी गुराजने का संकट पैदा हो गया है.
इधर, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का कहना है कि उनकी सरकार ने मई 2021 में सत्ता संभालने के बाद से अब तक 160 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा सरकारी और वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है. इस कार्रवाई में 50,000 से ज्यादा लोगों को बेदखल किया जा चुका है. सरकार का दावा है कि यह अभियान कानून-व्यवस्था और वन संरक्षण के लिए जरूरी है.
हिंदुस्तान टाइम्स ने अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि बेदखल किए जा रहे लोगों में ज्यादातर बंगाली भाषी मुस्लिम समुदाय के हैं. वे बताते हैं कि उनके पूर्वज ब्रह्मपुत्र नदी के कटाव की वजह से अपने 'चार' यानी नदी किनारे के तटीय इलाकों से विस्थापित होकर यहां आ बसे थे. स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दशकों में उन्होंने यहां घर, स्कूल और रोजमर्रा जिंदगी के लिए सभी बुनियादी सुविधाएं विकसित कर ली थीं.