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Assam News: असम में बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें बेदखल करने का अभियान जारी है. साथ ही कथित अवैध कब्जे के खिलाफ भी कार्रवाई हो रही है. इसी कड़ी में असम में एक नया बवाल खड़ा हो गया है. भारत और बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मौजूद असम के करीमगंज जिले का नाम बदलने को लेकर विवाद शुरू हो गया है. करीमगंज के स्थानीय लोगों ने असम सरकार के खिलाफ भारी विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. इस प्रदर्शन में ज्यादातर मुस्लिम समाज के लोग शामिल हैं.
असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. शहरों और नगरों के नाम बदलने वाली राजनीति BJP काफी पहले से करते आ रही है. इसी कड़ी में असम के करीमगंज जिले का नाम बदल दिया गया है. करीमगंज जिले का नाम बदल कर श्रीभूमि कर दिया गया है. असम के वामपंथी संगठन के लोगों ने नाम बदलने के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया है. वामपंथी संगठन का कहना है कि करीमगंज का नाम जिले के इतिहास से जुड़ा हुआ है. साथ ही करीमगंज का नाम बदलने से स्थानीय लोगों को तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है.
वामपंथी संगठन के लोगों ने कहा कि सरकारी कामकाज और कई जरूरी दस्तावेजों को लेकर करीमगंज के लोग परेशान हैं. वहीं, प्रदर्शन की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प भी हुई. सीमा के नजदीक होने की वजह से इस जिले को संवेदनशील माना जाता है.
स्थानीय मुस्लिम समुदाय का कहना है कि मुस्लिम पहचान वाले नाम होने की वजह से करीमगंज जिले का नाम बदला गया है. इस प्रदर्शन में स्कूल और कॉलेज के छात्रों ने भी हिस्सा लिया. मुस्लिम समुदाय ने नाम बदलने वाली घटना की निंदा की और इस फैसले को अस्वीकार कर दिया.
गौरतलब है कि भारत में शहरों, नगरों और स्टेशनों के नाम बदलने और उस पर राजनीति करने का सिलसिला जारी है. खास तौर पर भाजपा शासित राज्यों में मुस्लिम पहचान वाले नाम को बदला जा रहा है. इससे पहले कई जगहों के नाम बदले गए लेकिन इतना भारी विरोध नहीं देखने को मिला. वहीं, असम के करीमगंज जिले में नाम बदलने को लेकर भारी विरोध देखने को मिल रहा है.