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Assam News Today in Hindi: असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी (BJP) ने रिकॉर्ड जीत हासिल कर सत्ता में कम बैक किया. हालांकि, इस बार ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) को भारी नुकसान हुआ है. AIUDF ने साल 2021 में 16 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार महज दो सीटों पर सिमट कर रह गई. असम के सभी नवनिर्वाचित विधायकों के पद और गोपनीयता की शपथ शुरू हो चुकी है, लेकिन AIUDF विधायक बदरुद्दीन अजमल ऐसा नहीं कर सके. उन्होंने इसको लेकर विधानसभा अध्यक्ष से रियायत देने की मांग की है.
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अपने शपथ ग्रहण को लेकर विशेष व्यवस्था की मांग की. अजमल ने कहा कि विधानसभा सत्र की नई तारीख उनके हज यात्रा कार्यक्रम से टकरा रही है, इसलिए उन्होंने अध्यक्ष से सुविधा के मुताबिक शपथ दिलाने का अनुरोध किया है.
इसी के साथ AIUDF ने समान नागरिक संहिता (UCC) का विरोध करने और असम में दोबारा किसी सामाजिक-आर्थिक या नागरिकता सर्वे का विरोध करने का भी ऐलान किया है. गुवाहाटी में मीडिया से बातचीत करते हुए बदरुद्दीन अजमल ने बताया कि पहले विधानसभा का पहला सत्र 18 मई को होना तय था. बाद में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने घोषणा की कि सत्र 21 मई से शुरू होगा. अजमल ने कहा कि उसी दिन उनकी हज यात्रा पर जाने का प्रोग्राम पहले से तय है.
बदरुद्दीन अजमल ने कहा, "पहले सत्र 18 मई को होना था, लेकिन बाद में मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि यह 21 मई को होगा. उसी दिन मुझे हज के लिए रवाना होना है." उन्होंने आगे बताया कि "मैंने इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है और मीडिया के जरिये से भी अपनी बात रखी है. मेरा शपथ ग्रहण अध्यक्ष की सुविधा के मुताबिक कराया जाएगा."
बदरुद्दीन अजमल ने यह भी साफ किया कि उनकी पार्टी विधानसभा सत्र के दौरान समान नागरिक संहिता का विरोध करेगी. इससे पहले दिन AIUDF ने असम में किसी नए सामाजिक-आर्थिक या नागरिकता संबंधी सर्वे कराए जाने के प्रस्ताव का भी विरोध किया. पार्टी ने इसे समय की बर्बादी बताते हुए कहा कि इससे आम लोगों को सिर्फ परेशानियों का सामना करना पड़ेगा.
AIUDF के महासचिव रफीकुल इस्लाम ने राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की संभावित प्रक्रिया को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि नेशनल सिटीजन रजिस्टर पहले ही पांच सालों तक गहन जांच के बाद तैयार किया जा चुका है. ऐसे में दोबारा किसी नए सर्वे की जरूरत नहीं है.
रफीकुल इस्लाम ने कहा, "असम में नेशनल सिटीजन रजिस्टर पांच साल की जांच के बाद तैयार हुआ है. इससे बड़ा और क्या हो सकता है? यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. अब किसी नए सर्वे की जरूरत नहीं है." उन्होंने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन से सिर्फ समय बर्बाद होगा और लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा.
रफीकुल इस्लाम ने बीजेपी के अवैध घुसपैठिया वाले दावे पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अगस्त 2019 में प्रकाशित नेशनल सिटीजन रजिस्टर के आखिरी मसौदे ने ऐसे दावों को गलत साबित कर दिया. उन्होंने कहा कि कभी 90 लाख, कभी 50 लाख और कभी 70 लाख बाहरी लोगों के दावे किए गए, लेकिन आखिर में सिर्फ 19 लाख नाम ही लिस्ट से बाहर हुए.
AIUDF के महासचिव ने यह भी कहा कि इन 19 लाख लोगों में से कई ऐसे हैं, जिनके माता-पिता या भाई-बहनों के नाम नेशनल सिटीजन रजिस्टर में शामिल हैं. इसलिए आगे चलकर उनके नाम भी ठीक हो जाएंगे. रफीकुल इस्लाम का कहना है कि हकीकत में बिना दस्तावेज वाले लोगों की संख्या भविष्य में और कम हो जाएगी.