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Assam News: असम में बांग्लाभाषी मुसलमानों का दर्द बयां करते हुए सोशलिस्ट पार्टी इंडिया (एसपीआई) संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष सैयद तहसीन अहमद ने कहा कि मुसलमानों के पास सभी दस्तावेज होने के बावजूद उनके घरों और दुकानों को तोड़ दिया गया.
उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी खराब है कि उनके घरों को निशाना बनाया गया है. तहसीन ने कहा कि ये लोग दशकों से यहां रहते आ रहे हैं और उनके पास सभी दस्तावेज़ मौजूद हैं. सरकार के एक्शन पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि किस कानून के तहत दो दिन के नोटिस पर एक गांव को ध्वस्त करना उचित है. असम सरकार ने कानून की अवहेलना करके यह कार्रवाई की है।
तहसीन कहते हैं कि असम के मुसलमानों के खिलाफ हुए अत्याचारों और बर्बरता की समीक्षा के लिए सोशलिस्ट पार्टी इंडिया का 8 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 3 अगस्त को असम पहुंचा था. इस दौरान उन्होंने प्रभावित इलाके का दौरा किया और वहां के लोगों का हाल जाना.
तहसीन ने इल्जाम लगाया कि हसीला बल में, केवल दो दिनों के नोटिस पर 667 मुस्लिम परिवारों को तोड़ दिया गया. इस घटना के कारण अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं कर्बला स्थल में, 300 बेघर परिवार झोपड़ियों में रह रहे हैं. यह जमीन एक स्थानीय मुस्लिम किसान ने अस्थायी रूप से दी थी लेकिन सरकार इस किसान को परेशान कर रही है.
जन्नतपुर में, 161 परिवारों के घर ध्वस्त कर दिए गए. वे भी एक किसान के जरिए दी गई जमीन पर झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं. धाबारी जिले के बलसीपारा में, 2000 परिवारों के घर ध्वस्त कर दिए गए, जिसके कारण लगभग दस हजार लोग बेघर हो गए हैं, और सभी लोग एक ही स्थान पर आसमान की छाया में रह रहे हैं. इस जगह पर कमोबेश 200 पुलिसकर्मी तैनात थे. हमें अंदर जाने की अनुमति नहीं थी, लेकिन 100 से अधिक लोग बाहर आए और हमें अपनी दुर्दशा के बारे में बताया.