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Assam News Today: असम की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार एक बार हजारों मुस्लिम परिवारों को बेघर कर दिया. राज्य के गोलपाड़ा जिले के पाइकन रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में बड़े स्तर पर बुलडोजर की कार्रवाई की. इस कार्रवाई के दौरान 140 हेक्टेयर जमीन खाली कराई गई, जिसकी वजह से करीब 1,080 परिवार बेघर हो गए. प्रभावित परिवारों को भारी बारिश और तेज धूप में को खुले आसमान के नीचे रहने के मजबूर हैं.
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों में लगातार मुस्लिम परिवारों के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई की जा रही है. कल हुए इस कार्रवाई में 1080 प्रभावित परिवारों में से ज्यादातर बंगाली भाषी मुस्लिम परिवार हैं. गोलपाड़ा के अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान 2700 से ज्यादा घरों को ध्वस्त कर दिया गया है.
यह पिछले महीने हुई डिमोलिशन के बाद दूसरी बड़ी कार्रवाई है. इससे पहले बीते माह गोलपाड़ा के हसीलबील क्षेत्र में भी लगभग 1500 बीघे जमीन पर बुलडोजर चलाकर डिमोलिशन की कार्रवाई की गई थी, इस कार्रवाई के दौरान 690 से ज्यादा घरों को गिरा दिया गया था.
कथित समुदाय विशेष को निशाना बनाते हुए की गई कार्रवाई को लेकर प्रभावित परिवारों ने आप बीती सुनाई. गोलपाड़ा बिद्यापारा राजस्व गांव के रहने वाले मिजानुर रहमान (28) ने बताया कि उनके कुल तीन मकानों इस कार्रवाई में पूरी तरह से तोड़ दिया गया, जिसमें से एक मकान पक्का बना हुआ था. उन्होंने कहा, "हमारे पास अब कहीं कोई और जमीन नहीं है. हम लोग यहां उस समय से रह रहे हैं, जब इसे रिजर्व फॉरेस्ट घोषित भी नहीं किया गया था."
स्क्रॉल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, पाइकन की जिस जमीन पर डिमोलिशन की कार्रवाई की गई है, उसे 1959 में रिजर्व फॉरेस्ट घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया गया था. इस प्रस्ताव के 23 साल बाद यानी 1982 में इसे ऑफिशियल तरीके से रिजर्व फॉरेस्ट घोषित कर दिया गया. गोलपाड़ा जिला वकील संघ ने 2022 में सरकार और वन विभाग को ज्ञापन भेजा था. इस ज्ञापन के जरिये मांग की गई थी कि इस क्षेत्र में रह रहे लोगों के वन अधिकार और दावे अभी तक तय नहीं हुए हैं.
संघ ने 1891 के असम वन अधिनियम के तहत उचित प्रक्रिया अपनाने की मांग की थी. संघ के अध्यक्ष जितेन दास और सचिव वाजेद अली ने कहा कि बीते 40 सालों में ब्रह्मपुत्र नदी की कटान की वजह से गोलपाड़ा जिले के 472 गांव पानी में समा गए. हजारों लोग बेघर और वह अपनी खेतीबाड़ी और दूसरी जमीनों को भी गंवा बैठे. इनमें से बहुत से लोगों ने पाइकन रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन पर टीन-छप्पर बनाकर शरण ली थी.
हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने सिरफ गोलपाड़ा जिले में ही नहीं बल्कि धुबरी जिले में बड़ी पैमाने पर बंगाली बोलने वालों मुसलमानों के घरों को जमींदोज कर दिया. पिछले हफ्ते धुबरी में 1400 बंगाली मुस्लिम परिवारों के घरों को तोड़ दिए गए थे. इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को लिए पुनर्वास का वादा किया था और उन्हें एक मुश्त 50 हजार रुपये बतौर राहत राशि के रुप में देने का ऐलान किया था.
इतना ही नहीं बीते माह 30 जून को नलबाड़ी जिला के बारखेत्री राजस्व सर्किल में गांव के चरागाह की 150 एकड़ जमीन खाली करा दी गई और आसपास बसे 93 परिवारों को हटा दिया गया.इसके ठीक तीन दिन बाद यानी 3 जुलाई को लखीमपुर जिला के लगभग 70 एकड़ जमीन पर बुलडोजर चलाकर 220 परिवारों को बेदखल कर दिया गया.
राज्य की बीजेपी की अगुवाई वाली असम सरकार ने जिन जगहों पर कार्रवाई की है, उनमें से ज्यादातर प्रभावित मुस्लिम परिवार हुए हैं. डिमोलिशन की कार्रवाई को लेकर राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं. इसके तहत साल 2016 से अगस्त 2024 तक असम में 10 हजार 620 से ज्यादा परिवारों को सरकारी जमीन से बेदखल किया गया है, जिनमें से सबसे ज्यादा मुस्लिम समुदाय से हैं.