Australian PM Anthony Albanese on Netanyahu Remarks: सिडनी के बोंडी बीच हमले को फिलिस्तीन से जोड़ने की इजरायली कोशिशों को ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने फिलिस्तीन को देश के रूप में औपचारिक मान्यता देने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए टू-स्टेट समाधान का समर्थन करते हुए एकता, शांति और कानून-व्यवस्था को सर्वोपरि बताया.
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Sydney Bondi Beach Incident: ऑस्ट्रेलिया के सिडनी के बोंडी बीच पर हुए आतंकी हमले का पूरी दुनिया में विरोध हो रहा है. इस आतंकी हमले को लेकर अब इजरायल ने नया वावेला खड़ा कर दिया है. वह इस हमले को फिलिस्तीन से जोड़कर पेश कर रहा है और ग़ज़ा में बेगुनाह लोगों के नरसंहार को जायज ठहराने लगा है. हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने इसको सिरे से खारिज कर दिया है.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने अपने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस बयान से विरोध जताया, जिसमें नेतन्याहू ने बोंडी बीच आतंकी हमले को फिलीस्तीन से जोड़ा. प्रधानमंत्री अल्बनीज ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के इस सुझाव को खारिज कर दिया कि ऑस्ट्रेलिया के फिलिस्तीन को देश के रूप में मान्यता देने से आतंकवादी हमला हुआ, जिससे यहूदी विरोधी आग में घी डाला गया.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने ऑस्ट्रेलियाई वीकली-नाइट टेलीविजन करेंट अफेयर्स कार्यक्रम ABC के 7.30 रिपोर्ट में शिरकत की. इस दौरान उनसे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयान को लेकर सवाल किया गया, लेकिन अल्बनीज ने इसका सीधा जवाब देने से बचते हुए स्पष्ट टिप्पणी नहीं की.
नेतन्याहू ने आरोप लगाया था कि एंथनी अल्बनीज ने ऑस्ट्रेलिया में यहूदी-विरोध (एंटी-सेमिटिज्म) को फैलने से रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. उन्होंने यह भी कहा था कि अल्बनीज ने 'कमजोरी को कमजोरी से और तुष्टीकरण को और ज्यादा तुष्टीकरण से बदल दिया है.' कार्यक्रम में जब अल्बनीज से पूछा गया कि क्या वह फिलिस्तीनी राष्ट्र को मान्यता देने और सिडनी के बोंडी बीच में हुए हमले के बीच किसी तरह के संबंध को स्वीकार करते हैं, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा, "नहीं, मैं ऐसा नहीं मानता और दुनिया के ज्यादातर देश टू स्टेट समाधान को ही मिडिल ईस्ट में आगे बढ़ने का रास्ता मानते हैं."
अल्बनीज ने शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को अपनी सबसे बड़ी जिम्मेदारी बताया. उन्होंने कहा, "मुझसे यह अपेक्षा की जाती है कि ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री के तौर पर मैं देश को एक साथ लाऊं, एकता को बढ़ावा दूं और यह कहूं कि यह राष्ट्रीय एकता का क्षण है, जहां हमें मिलकर आगे बढ़ने की जरूरत है."
गौरतलब है कि इतवार (14 दिसंबर) को सिडनी के बोंडी बीच पर आठ दिवसीय हनुक्का पर्व के पहले दिन यहूदी समुदाय के लोग कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे. इसी दौरान दो दहशतगर्दों ने निहत्थे लोगों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इस हमले की दुनिया भर में कड़ी निंदा की गई. हमले में एक शख्स अहमद अल अहमद को आतंकी से जान की परवाह किए बगैर भिड़ते हुए देखा गया है.
इस घटना को अब इजरायल और बेंजामिन नेतन्याहू भुनाने में लगे हैं. नेतन्याहू ने देर शाम को एक बयान में कहा कि उन्होंने तीन महीने पहले ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा था, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि उनकी नीतियां यहूदी-विरोधी भावना को और भड़का रही हैं. नेतन्याहू ने बताया कि यह पत्र उन्होंने अगस्त महीने में एंथनी अल्बनीज को भेजा था, जब कैनबरा ने फिलिस्तीनी राष्ट्र को मान्यता देने की घोषणा की थी.
दक्षिणी इजरायल में एक कार्यक्रम के दौरान टेलीविजन पर सार्वजनिक संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि यहूदी-विरोध एक ऐसा कैंसर है, जो तब फैलता है जब नेता चुप रहते हैं और कोई कार्रवाई नहीं करते. इस दौरान नेतन्याहू ने ग़ज़ा में नरसंहार को इस हमले के पीछे छिपाने की कोशिश की, जहां बीते दो सालों में इजरायली फौज अब तक 70 हजार फिलिस्तीनियों की हत्या कर चुकी है.
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