Azam Khan Spreading Enmity Case: आज़म खान को एक स्पेशल कोर्ट ने नफरत फैलानी वाले मामले में बरी कर दिया है. उन पर आरएसएस और शिया रहनुमा मौलाना कल्बे जवाद के खिलाफ ऐसा बयान देने का आरोप था जिनसे उनकी छवि धूमिल हो रही थी.
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Azam Khan Spreading Enmity Case: शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आज़म खान को एक स्पेशल कोर्ट ने उस मामले में बरी कर दिया, जिसमें उन पर नफरत फैलाने, सरकारी लेटरहेड और मोहर का गलत इस्तेमाल करने, और बीजेपी, आरएसएस और प्रमुख शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी के खिलाफ छवि को नुकसान पहुंचाने नाले बयान देने के आरोप थे.
विशेष एसीजेएम (एमपी/एमएलए कोर्ट) आलोक वर्मा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को पर्याप्त सबूतों के साथ साबित करने में नाकामयाब रहा और यह मामला समय सीमा से बाहर था. अदालत ने कहा कि कथित घटना साल 2014 की है, जबकि एफआईआर पांच साल बाद 2019 में दर्ज की गई थी, जिससे यह मामला दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 468 के तहत समय-सीमा से बाहर हो गया.
अदालत ने बचाव पक्ष की इस दलील को भी कबूल किया कि शिकायत मौलाना जवाद नकवी की ओर से अल्लामा आमिर नकवी ने दर्ज कराई थी, जबकि मौलाना जवाद न तो खुद पीड़ित शख्स थे और न ही उनके पास कानूनी रूप से एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार था.
जिरह के दौरान आमिर नकवी ने खुद स्वीकार किया कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई मानहानि नहीं हुई थी. अदालत ने CrPC की धारा 199 का हवाला देते हुए कहा कि केवल वही व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकता है जो वास्तव में पीड़ित हो या जो कानूनी रूप से उसके behalf पर अधिकृत हो (जैसे नाबालिग या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के मामले में).
अपने विस्तृत आदेश में अदालत ने यह भी कहा कि वह प्रेस विज्ञप्ति, जिसके आधार पर शिकायत दर्ज कराई गई थी, न तो केस रिकॉर्ड का हिस्सा थी और न ही जांच डायरी में इसकी कोई डिटेल है. अदालत ने अपने फैसले में कहा, "सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद, अदालत इस निष्कर्ष पर पहुँची है कि आरोपी आज़म खान के खिलाफ लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए हैं. अतः उन्हें बरी किया जाता है."
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, यह एफआईआर 1 फरवरी 2019 को हजरतगंज थाने में दर्ज की गई थी. इसमें आरोप था कि आज़म खान ने अपने मंत्री पद का गलत इस्तेमाल करते हुए बीजेपी, आरएसएस और मौलाना जवाद नकवी के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री पब्लिश की, जिससे उनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा. शिकायत में यह भी कहा गया था कि इस एफआईआर को शुरू में सरकारी दबाव में दबा दिया गया था.
अदालत के इस आदेश के साथ आज़म खान को 2019 के इस मामले में सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया है. फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए आज़म खान ने कहा, "यह फैसला बहुत ईमानदारी के साथ हुआ है. मैं केवल जज के लिए दुआ कर सकता हूं और उनका शुक्रिया अदा करता हूं."
उन्होंने आगे कहा, "कानून और व्यवस्था पर मैं बस इतना कहूंगा कि अब सिर्फ 'व्यवस्था' बची है. कानून को भी न्याय के रूप में बने रहना चाहिए, जैसा आज हुआ है."