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Baba Ramdev on Zakat: राजस्थान के सीकर जिले की मशहूर धार्मिक पीठ रेवासा धाम में आज यानी 18 अगस्त को योग गुरु बाबा रामदेव पहुंचे. यहां पहले से ही सात दिवसीय भागवत कथा में बाबा ने हिस्सा लिया और महंत राघवाचार्य को खिराज-ए-अकीदत पेश किया. इसके बाद बाबा रामदेव ने समाज में दान और सेवा की परंपरा पर जोर देते हुए मुसलमानों की जकात प्रथा का उदाहरण दिया.
उन्होंने कहा कि मुसलमान चाहे गरीब हो या मजदूरी करने वाला, फिर भी वह अपनी कमाई का 6 फीसद हिस्सा जकात के रूप में देता है. यह पैसा सीधे धर्म और जरूरतमंदों की सेवा में जाता है. बाबा रामदेव ने कहा कि आज के समय में मुस्लिम समुदाय का मजदूर भी रोजाना 500 से 1000 रुपये तक कमा रहा है, लेकिन इसके बावजूद वह जकात देना नहीं भूलता.
बाबा रामदेव ने आगे कहा कि मुसलमान अब सिर्फ मजदूरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीकी कार्यों और हुनरमंद कामों में भी आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने यह भी माना कि जकात की परंपरा ही उन्हें मजबूती देती है क्योंकि हर व्यक्ति अपने धर्म और समाज के लिए योगदान देता है. इसके साथ ही बाबा रामदेव ने हिंदू समाज को भी संदेश दिया कि वे शास्त्रों में लिखी दान परंपरा को अपनाएं.
उन्होंने कहा कि जो इंसान दान नहीं करता, वह हमेशा आर्थिक और सामाजिक रूप से पीछे रह जाता है. हमारे धर्मग्रंथों में भी स्पष्ट लिखा है कि दान करने से पुण्य मिलता है और समाज मजबूत होता है. इसलिए हर व्यक्ति को अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा जरूर दान करना चाहिए." इस दौरान कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालु बाबा रामदेव के विचारों से काफी प्रभावित दिखे. उन्होंने कहा कि अगर सभी लोग दान और सेवा की भावना से आगे आएं तो समाज में गरीबी और विषमता को कम किया जा सकता है.
बाबा रामदेव ने कही ये बड़ी बात
रेवासा धाम में चल रही भागवत कथा के दौरान बाबा रामदेव का यह बयान चर्चा का विषय बन गया. उनके विचारों को लोगों ने एक सामाजिक संदेश के रूप में लिया और कहा कि यह केवल धार्मिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि समाज सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण है.