Badar Khan Soori: बदर खान सूरी नाम के एक शख्स को अमेरिकी कोर्ट ने रिहा किया है. सूरी पर हमास के साथ रिश्ते होने का आरोप था. हालांकि, उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं था. उन्हें 2 महीनों बाद जेल से रिहा किया गया है.
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Badar Khan Soori: अमेरिका में रहने वाले भारतीय रिसर्चर बदर खान सूरी को हमास से कथित रिश्तों के आरोप में बीते दो महीनों से हिरासत में रखा गया था. अब उन्हें आखिरकार रिहा कर दिया गया है. रिहाई के बाद उन्होंने अपने साथ हुए अमानवीय व्यवहार की पूरी कहानी साझा की है.
बदर खान सूरी अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में पोस्टडॉक्टरल फेलो थे. मार्च में वर्जीनिया स्थित उनके घर से उन्हें हमास से कथित संबंधों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. अमेरिका हमास को आतंकवादी संगठन मानता है. गिरफ्तारी के दौरान ट्रंप प्रशासन ने गाजा में सूरी की पत्नी के पारिवारिक संबंधों को आधार बनाकर उनका छात्र वीजा भी रद्द कर दिया था और सोशल मीडिया पर हमास के समर्थन के आरोप लगाए थे.
एनबीसी न्यूज से बातचीत में सूरी ने बताया कि हिरासत के पूरे दो महीने में उन पर किसी भी तरह का ठोस आरोप नहीं था. उन्होंने कहा,"मुझे जंजीरों में जकड़ा गया था, मेरे हाथ, पांव और शरीर सब बंधे हुए थे. पहले 7-8 दिन तो मुझे अपनी परछाई भी याद आने लगी थी." उन्होंने बताया कि हिरासत केंद्र की हालत बहुत खराब थी. गंदगी फैली हुई थी, सफाई नहीं थी, और जब उन्होंने शिकायत की, तब भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.
तीन बच्चों के पिता सूरी ने बताया कि सबसे कठिन समय अपने परिवार से दूर रहना था. उन्होंने कहा कि उनका 9 साल का बेटा और जुड़वां बेटियां उन्हें बहुत मिस कर रहे थे. उन्होंने कहा कि मेरे बेटे को पता था कि मैं कहां हूं. मेरी पत्नी ने बताया कि वह रोता रहता है."रिहा होने के बाद टेक्सास के अल्वाराडो से सूरी ने कहा, "हालांकि इसमें दो महीने लग गए, लेकिन मैं आभारी हूं कि मुझे आखिरकार रिहा कर दिया गया. लेकिन न्याय में देरी भी एक तरह से अन्याय ही है."
सूरी के वकीलों ने बताया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप उनकी पत्नी मफेज सालेह के पारिवारिक बैकग्राउंड पर आधारित थे. उनकी पत्नी के पिता ने गाजा में हमास-समर्थित प्रशासन में 7 अक्टूबर 2023 से पहले काम किया था. अमेरिकी जिला जज पेट्रीसिया टॉलिवर जाइल्स ने सूरी की रिहाई का आदेश देते हुए कहा कि उनके खिलाफ कोई सार्वजनिक खतरा नहीं है और उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है.
जज ने First Amendment का हवाला देते हुए कहा कि यह नागरिकों और गैर-नागरिकों में फर्क नहीं करता. सूरी की रिहाई से उनकी पत्नी और बच्चों ने राहत की सांस ली. मफेज सालेह ने कहा, "मैं जज को दिल से गले लगाना चाहती हूं, मेरी और मेरे बच्चों की तरफ से जिन्होंने हर दिन अपने पिता को वापस देखने की उम्मीद रखी."