Court on Bahraich Murder Case: उत्तर प्रदेश के बहराइच में रामगोपाल मिश्रा की हत्या के मामले में कोर्ट ने एक आरोपी को मौत की सजा और नौ अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई. इस हिंसा ने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अशांति फैलाई थी और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी.
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Bahraich News Today: उत्तर प्रदेश के बहराइच में 13 अक्टूबर 2024 को दुर्गा की मूर्ती विसर्जन के दौरान हुई हिंसा में मारे गए रामगोपाल मिश्रा के केस में मुजरिम सरफराज को फांसी की सजा के साथ ही उसके बाप और दो भाइयों समेत कुल 9 अफराद को उम्रकैद की सजा सुनाई है है. सजा का ऐलान गुरुवार को किया गया है. इससे पहले बुधवार को कोर्ट ने 13 आरोपियों में 3 को दोष मुक्त करते हुए 10 पर अपना फैसला महफूज़ रख लिए था.
बुधवार को जिन लोगों को मुजरिम करार दिया गया उनमें अब्दुल हमीद, फहीम, सरफराज, तालिब, सैफ,जावेद, ज़ीशान, शोएब, ननकऊ, मारुफ़ शामिल थे.
वहीँ, इस मामले में खुर्शीद, शकील और अफजल को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया था. कोर्ट के इस फैसले से जहाँ मृतक रामगोपाल के परिवार ने ख़ुशी का इज़हार किया है, वहीँ मुजरिमों के अहले खाना ने कोर्ट के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है.
क्या है पूरा मामला?
बता दें, उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की एक स्थानीय अदालत ने गुरुवार को 21 वर्षीय रामगोपाल मिश्रा की हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाया. इस मामले में अदालत में एक शख्स को मौत की सजा और नौ अन्य को उम्रकैद की सजा सुनाई. यह हत्या 13 अक्टूबर 2024 को महाराजगंज के हरदेई पुलिस स्टेशन इलाके की जब एक दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान साम्प्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी.
इस संबंध में सरकारी वकील गिरिश चंद्र शुक्ला ने बताया कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (प्रथम) पवन कुमार शर्मा की अदालत ने 9 दिसंबर 2025 को कुल दस आरोपियों को दोषी करार दिया था. आरोपियों में सरफराज, अब्दुल हमीद, मोहम्मद तलीब, फैहीम, जीशान, मोहम्मद सैफ, जावेद, सोएब खान, ननकऊ और मारूफ अली शामिल थे. अदालत ने खुरशीद, शकील और अफजल को सुबूत के अभाव में बरी कर दिया.
मुठभेड़ में मारे गए दो आरोपी
गुरुवार को अदालत ने सरफराज को मौत की सजा दी, जिसे रामगोपाल मिश्रा पर गोली चलाने वाला बताया गया था. बाकी नौ दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. इसके अलावा अदालत ने हत्या के आरोप के अलावा अन्य संबंधित अपराधों के तहत भी सजा और जुर्माना लगाया. इस मामले में शुरूआत में 13 आरोपियों के नाम एफआईआर में थे. उनमें से दो पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे जब वे भागने की कोशिश कर रहे थे, जबकि बाकी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
अभियोजन पक्ष ने 11 जनवरी 2025 को सभी 13 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी और 18 फरवरी को अदालत ने आरोप तय किए थे. 13 महीने की सुनवाई के बाद अदालत ने दस आरोपियों को दोषी ठहराया और तीन को बरी किया. रामगोपाल मिश्रा की हत्या ने महसी, महाराजगंज और बहराइच शहर के कुछ हिस्सों में हिंसा फैल गई थी. इसके बाद अगले दिन हिंदूवादी संगठनों ने बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ और आगजनी की, जिसके बाद पूरे इलाके में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है.