ICT sentences Sheikh Hasina to death: बीते साल 17 नवंबर को बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को मौत की सजा सुनाई थी. इस केस से जुड़ा फैसला, सुबूत और अन्य बातों को अब सार्वजनिक कर दिया गया. इसकी एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने कड़ी निंदा की है.
Trending Photos
)
Bangladesh News Today: बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को दी गई मौत की सजा से जुड़ा पूरा लिखित फैसला जारी कर दिया है. यह फैसला कुल 457 पेज का है, जिसमें कोर्ट की पूरी दलील, घटनाओं का ब्यौरा और कानूनी आधार दर्ज है.
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, यह दस्तावेज अब ट्रिब्यूनल की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है. ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रिब्यूनल ने 2024 के जुलाई-अगस्त में हुए 'एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट' के दौरान की गई हिंसा को इंसानियत के खिलाफ अपराध माना है. ट्रिब्यूनल-1 की तीन सदस्यीय बेंच ने इस मामले में 17 नवंबर 2025 को मौखिक फैसला सुनाया था. अब उसी फैसले का विस्तृत लिखित संस्करण सार्वजनिक किया गया है.
ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल को दो मुख्य आरोपों में दोषी ठहराया है. 'प्रोथोम आलो' की रिपोर्ट के मुताबिक, पहला चार्ज तीन घटनाओं पर आधारित है. इसमें 14 जुलाई 2024 को गणभवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रदर्शनकारियों को 'रजाकार' कहकर उकसाना शामिल है. इसी चार्ज में ढाका यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर मकसूद कमाल से बातचीत के दौरान छात्रों को फांसी देने का आदेश देने का आरोप भी है. इसके अलावा रंगपुर में अबू सईद की पुलिस फायरिंग में हुई मौत को भी इसी चार्ज में जोड़ा गया है.
इन तीनों घटनाओं के लिए शेख हसीना और कमाल को उम्रकैद की सजा सुनाई गई. दूसरा चार्ज भी तीन घटनाओं से जुड़ा है. इसमें 18 जुलाई 2024 को पूर्व ढाका साउथ सिटी कॉर्पोरेशन मेयर फजले नूर तापोश और जसद के प्रेसिडेंट हसनुल हक इनु के साथ फोन पर बातचीत के दौरान ड्रोन से प्रदर्शनकारियों की लोकेशन ट्रैक करने और हेलिकॉप्टर से घातक हथियारों के जरिए हमला करने का आदेश देना शामिल है. इसके साथ ही इन अपराधों को रोकने में विफल रहने का आरोप भी जोड़ा गया है.
इसी चार्ज में 5 अगस्त 2024 को चनखरपुल में पुलिस फायरिंग से छह प्रदर्शनकारियों की मौत और सावर के आशुलिया इलाके में छह लोगों की हत्या कर शव जलाने की घटना को भी शामिल किया गया है. इन तीनों घटनाओं के लिए शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल को फांसी की सजा सुनाई गई.
ट्रिब्यूनल ने यह भी आदेश दिया है कि शेख हसीना और कमाल की सभी संपत्तियों को जब्त कर जुलाई हिंसा के पीड़ितों में बांटा जाए. पूर्व इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामुन, जो इस मामले में सरकारी गवाह बन गए थे, उन्हें दोनों आरोपों के तहत पांच साल की कैद की सजा दी गई थी.
ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस एमडी गोलाम मोर्तुजा मजुमदार ने कहा कि शेख हसीना को तीन मामलों में दोषी पाया गया है, उकसाने, हत्या का आदेश देने और अत्याचारों को रोकने में विफल रहने के आरोपों में. शेख हसीना इस समय भारत में निर्वासन में हैं और पहले ही इस फैसले को 'पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित' बता चुकी हैं. बांग्लादेश सरकार ने भारत से शेख हसीना और असदुज्जमां खान कमाल के प्रत्यर्पण की मांग की है.
वहीं, एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच ने इस सजा की निंदा की है. इन संगठनों ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया और कहा कि यह ट्रायल अनुचित था, क्योंकि फैसला दोनों की गैरमौजूदगी में सुनाया गया. संयुक्त राष्ट्र ने भी मौत की सजा का विरोध किया था और साथ ही यह कहा था कि पीड़ितों के लिए न्याय बेहद जरूरी है.
यह भी पढ़ें: Mangaluru: 'तू बांग्लादेशी है' धर्म देखकर दिलजान पर टूटा कहर; हिन्दू महिला ने ही बचाई जान!