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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड(ATS) ने पांच मुस्लिम नौजवानों को सरकार का तख्तापलट कर देश में शरिया कानून लागू करने की साजिश में गिरफ्तार किया है. ये गिरफ्तारी 29 सितम्बर को पुलिस ने पांच अलग- अलग लोकेशन से दिखाया है. पुलिस का इलज़ाम है कि ये चारों पाकिस्तान के कट्टरपंथी तंजीमों के संपर्क में थे, और भारत में लोकतंत्र को खत्म करना चाहते थे!
गिरफ्तार किये गए लोगों में सुल्तानपुर निवासी अकमल रजा, सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज का रहने वाल सफील सलमानी उर्फ अली रजवी, कानपुर के सुजातगंज का मोहम्मद तौसीफ और रामपुर का कासिम अली शामिल है. एक गिरफ्तारी केरल से की गई है. फतेहपुर जिले के राधानगर थाना क्षेत्र के अंदौली गांव के निवासी मोहम्मद रजा चार साल से केरल में रह रहा है, उसे वहीँ से हिरासत में लिया गया है.
एटीएस ने दावा किया है कि यह लोग सोशल मीडिया ग्रुप्स पर एक्टिव थे और लोगों को कट्टरपंथी सोच अपनाने के लिए उकसा रहे थे. ये लोग 'मुजाहिदीन आर्मी' नाम का संगठन बनाकर हथियार खरीदने की योजना बना रहे थे. पुलिस ने ये भी दावा किया है कि इनकी योजना देश के हिंदूवादी नेताओं की टारगेट किलिंग करने की भी थी. इनका मंसूबा गैर-मुस्लिमों के खिलाफ ये जिहाद छेड़ना था.
एटीएस ने इनके पास से पांच मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम-डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और फोन-पे स्कैनर बरामद किया है. कोई हथियार आदि बरामद नहीं हुआ है. इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है कि अगर वक्त रहते कार्रवाई न की जाती तो आरोपी बड़े आतंकी हमले को अंजाम दे सकते थे.
चूंकि सभी आरोपी मुस्लिम है और दाढ़ी- टोपी वाले भी हैं, तो गिरफ्तारियों पर सवाल उठाना भी लाजिमी है. कुछ धार्मिक नेताओं ने इस गिरफ्तारी पर यह कहते हुए सवाल उठाया है कि पांच आदमी देश का तख्ता कैसे पलट सकता है ? लोकतंत्र को ख़त्म कर शरिया कानून कैसे लागू कर सकता है? अगर सच में इनकी कोई ऐसी प्लानिंग होती तो इस्नके पास हथियार आदि भी बरामद हो सकते थे? फिलहाल पुलिस ने चारों आरोपियों को जेल भेज दिया है. गिरफ्तार किये गए सभी आरोपियों के सामाजिक और आर्थिक हालत निम्न स्तर के हैं. कोई मजदूर, कोई मेकैनिक तो कोई बाल काटने का काम करता है. लेकिन सभी में एक कॉमन बात ये है कि ये सभी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते थे. उनके घर वालों के मुताबिक वो सोशल मीडिया पर दीनी पोस्ट करते थे जबकि पुलिस के मुताबिक भड़काऊ पोस्ट करते थे.
पकड़े गए आरोपी मुजरिम है कि नहीं ये फैसला अदालत करेगी लेकिन इससे इतना तो साफ़ है कि सोशल मीडिया पर बिना सोचे- समझे किया गया धार्मिक और भड़काऊ पोस्ट किसी के लिए कितना खतरनाक हो सकता है. उसे सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है. अगर ऐसा करने वाला मुसलमान हो तो वो 100 गुना ज्यादा खतरे के रडार पर पहुँच सकता है. अगर पाँचों दोषी हैं, तो उन्हें कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए, लेकिन इससे मुस्लिम नौजवानों को सीख लेने और होशियार होने की ज़रूरत है कि वो किसी तरह के भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट से दूर रहे. किसी लालच या दबाव में देश-विरोधी किसी तरह की गतिविधियों में हिस्सा न लें.
ऐसे मामलों में अक्सर पुलिस की एकतरफा कारवाई होती है, और मीडिया एकतरफा रिपोर्ट पब्लिश करता है.. हम इस मामले में चार आरोपियों के घर वालों से बात कर उनका पक्ष भी रिपोर्ट कर रहे हैं.
अकमल रजा
अकमल रजा सुल्तानपुर जिले के हलियापुर थाना क्षेत्र के ककड़कौला गांव का रहने वाला शराफत अली का बेटा है. शराफत अली दिल्ली में रहकर एक छोटा सैलून चलाते हैं. शराफत अली का ताल्लुक सलमानी बिरादरी से है, जिसका पेशा बाल- दाढ़ी काटना होता है. गाँव में रहने वाले शराफत अली के भाई- भतीजा भी यही काम करते हैं. शराफत का दो और लड़का दिल्ली में बाप के साथ ही सैलून में बाल- दाढ़ी काटने का काम करता है.
सुल्तानपुर में अकमल का दादा का बनाया हुआ पुश्तैनी मकान है. 400 स्क्वायर फीट के छोटे से मकान में दो भाइयों का हिस्सा है. घर वैसा ही है, जैसे किसी भी मजदूर का होता है. घर में एक बकरी और मुर्गियां भी पाली जाती है. अकमल रज़ा अक्सर अपने गाँव आता- जाता रहता है. उसकी चाची शकीला बानो ने बताया कि सोमवार को जब अकमल चप्पल लेने के लिए जगदीशपुर जाने के लिए निकला तो वापस नहीं आया. देर रात एटीएस ने फ़ोन का सूचना दिया कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. वो दो दिन पहले ही दिल्ली से गाँव गया था.
अकमल की गिरफ्तारी से गाँव में उसके घर और आस- पड़ोस में सन्नाटा है. लोग तरह- तरह की बातें कर रहे हैं. सभी को इस बात की हैरत है कि वो देश विरोधी काम कैसे कर सकता है? उसकी चाची शकीला बानो का कहना है कि वह कभी भी इस तरीके की गतिविधियों में शामिल होता नहीं देखा गया. गाँव में ऐसा कोई काम कभी नहीं करता था जिससे किसी को उसपर कोई शक हो ? गांव वालों का कहना है कि उसे कभी भी अपने धर्म के प्रति किसी तरीके की बातचीत करते किसी ने नहीं सुना.
गांव के प्रधान के प्रतिनिधि विनोद कुमार सिंह कहते हैं, " अकमल की आने-जाने का वक़्त देर रात में जरूर होता था, जिससे कुछ संदिग्ध तो लगता था लेकिन हम सभी को यह नहीं पता कि वह किसी गतिविधि में शामिल रहता था. अकमल के देर रात घर से आने- जाने की बात उसकी चाची भी स्वीकार करती है. 
सोनभद्र में अपने घर के बाहर आरोपी अकमल की चाची शकीला बानो
सफील सलमानी उर्फ अली रजवी
सोनभद्र जिले के करमा थाना क्षेत्र के भदोही गांव का रहने वाला सफील सलमानी उर्फ अली रजवी मीर मोहम्मद का लड़का है. मेरे अली मुंबई में मजदूरी करता है. अली रजवी चार भाइयों में तीसरे नंबर पर है. एक भाई पिता के साथ मुंबई में ही रहता है. दूसरा सोनभद्र नगर में और तीसरा ऑटो चलाता है. सफील की एक बहन भी है. परिवार की पृष्ठभूमि बेहद सामान्य है.
सफ़ील रिजवी की मां नजमुन कहती है, "हमारे बेटे बाबू (सफील) को भोर में 4 बजे के आसपास एक सुमो से आए पुलिस वाले उठा ले गए. उन्होंने कुछ भी नहीं बताया कि क्यों ले जा रहे हैं? बाबू छोटा मोटा काम करता है. बाबू धार्मिक किताब लेकर पढ़ा करता था. मोबाइल चलाते हमने नहीं देखा. मेरा बेटा कोई गलत काम नहीं करता था." अली रजवी की असल पहचान जितनी साधारण दिखती है, वो उतना सा खतरनाक हो सकता है. अली अपने फेसबुक आईडी पर खुद को एक न्यूज पोर्टल का जिला रिपोर्टर लिखता था. ATS का इलज़ाम है कि वो सोशल मीडिया पर लगातार कट्टरपंथी पोस्ट डालकर युवाओं को बरगलाने की कोशिश कर रहा था. अली रजवी व्हाट्सएप और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर विदेशी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था. लगातार कट्टरपंथी कंटेंट शेयर कर रहा था और हिंदू धर्मगुरुओं की हत्या की बात करता था. उसकी इसी संदिग्ध गतिविधियां एटीएस की नज़र में आ गई.
सफील सलमानी के पड़ोसी मुरीद अली कहते हैं, "हम सफ़िल अहमद को नहीं बाबू अली (उसका घर का नाम) को जानते हैं. ये सब कोई काम नहीं करते हैं. सिर्फ घूमना फिरना करते हैं. मां मजदूरी करके सभी का पेट पालती है. मेरे द्वारा जो जमीन दान में दी गई है, उसी पर मकान बनाकर रहते हैं.
आरोपी अली रिज़वी की सोशल मीडिया से ली गई तस्वीर
कासिम अली
रामपुर के बिलासपुर के खजुरिया थाना क्षेत्र का रहने वाला कासिम अली बब्बू शाह का लड़का है. मंगलवार को कासिम की गिरफ्तारी के बाद सराय कदीम गांव में मातम जैसा माहौल है. कासिम के घर पर पुलिस, खुफिया एजेंसी और मीडिया का जमावड़ा लगा था. कसिम को गांव के चौराहे से गिरफ्तार किया गया है. उसके पिता का खेती- किसानी का काम है. कासिम चार भाई- बहनों में सबसे बड़ा है. उसकी एक बहन है, जिसकी डेढ़ वर्ष पहले ही शादी हुई है. कासिम दिल्ली में रहकर एसी का काम करता है. दो महीने पहले ही गांव आया था. मंगलवार को पुलिस ने उसे देशविरोधी कामों में लिप्त होने के इलज़ाम में गिरफ्तार कर लिया है. वो 12 वीं तक पढ़ा है. गाँव आने पर वो पिता के साथ खेतों में काम करता था. कासिम की माँ नन्न्ही ने बताया कि उसे अभी कुछ ज्यादा नहीं मालूम है. उसने इतना बताया कि वो कोई वीडियो बनाकर डाला था, जिसमें उसे गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने कहा कि उनका बेटा निर्दोष है, क्योंकि परिवार ने कभी उसे कोई गलत काम करते हुए नही देखा है. वो नमाज पढ़ता था और अपने काम से काम रखता था. कुछ दिन पहले ही उसे एक बेटी हुई है.

रामपुर में अपने घर के बाहर कासिम की माँ नन्निही
मोहम्मद रजा
मोहम्मद रजा फतेहपुर जिले राधानगर थाना क्षेत्र के अंदौली गांव का निवासी है. पुलिस ने मंगलवार को उसे केरल से गिरफ्तार किया है. उसकी खबर मिलने के बाद उसके घर पर सन्नाटा पसरा हुआ है. अर्धनिर्मित मकान के देहरी से बाहर आकर घर की महिलाएं उदासी की आलम में बैठी हुई है. पुलिस और मीडिया के लोग घर पर आ- जा रहे हैं. सभी को देखने के लिए बच्चों की हमेशा भीड़ लगी रहती है. गाँव और आस- पड़ोस के लोग मोहम्मद रजा के परिवार को शक और दया के मिश्रित भाव से देख रहे हैं.
मोहम्मद रजा के पिता जावेद की दस साल पहले मौत हो चुकी है. रज़ा चार भाइयों में सबसे बड़ा है. उसका भाई जीशान और शहजाद भी उसके साथ केरल में मजदूरी करता है. एक भाई की भी मौत हो चुकी है.

कुर्सी पर ब्लू कपड़े में बैठी मोहम्मद रज़ा की माँ जमीला और उसके घर की महिलाएं.
रज़ा की माँ जमीला बताती है कि करीब चार साल पहले रज़ा मुंबई कमाने जाने का बोलकर घर से निकला था. बाद में बताया कि वो केरल चला गया. वो साल में एक बार घर ज़रूर आता है. केरल में वह क्या करता है जमीला को नहीं मालूम है, लेकिन वो बताती है कि शायद किसी कम्पनी में काम करता है.
सोमवार की शाम को उसकी बेटे रजा से मोबाइल फोन पर बात हुई थी. उसने बताया था कि सबकुछ ठीक है. नमाज पढ़ने के बाद वो खाना खाने जा रहा है. इसके कुछ देर बाद ही एटीएस की टीम पहुंची और रजा के दोनों हाथों में हथकड़ी लगाकर उसे ले गयी. जमीला के मुताबिक, उसके पकड़े जाने की बात उसके दूसरे बेटे जीशान ने गिरफ्तारी के कुछ देर बाद बताई थी.
ग्रामीणों की माने तो वह सोशल मीडिया पर अक्सर दीनी पोस्ट करता था. जब गाँव आटा था तो बहुत कम लोगों से बातचीत करता था. घर के आसपास के लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि रजा ऐसा कोई काम काम कर सकता है. जमीला कहती है, " मेरा बेटा निर्दोष है. पुलिस को ज़रूर कोई गलतफहमी हुई होगी. वो कोई ऐसा वैसा काम नहीं कर सकता है.
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