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Bareilly News Today: कहते हैं कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं. इसका नजारा बरेली में सालों पहले हुई हत्या के एक केस में देखने को मिला. इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्देश पर बरेली पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है, जो लगभग 38 सालों से पुलिस कार्रवाई से बचता फिर रहा था. आरोपी पर अपने ही भाई की हत्या करने का संगीन इल्जाम है.
मिली जानकारी के मुताबिक, यह मामला साल 1987 का है, जब बरेली के शाही कस्बे के रहने वाले प्रदीप कुमार सक्सेना पर उसके भाई संजीव सक्सेना की हत्या का मामला दर्ज हुआ था. पुलिस के मुताबिक, प्रदीप को अदालत ने जेल भेजा था, लेकिन 1989 में उसे कुछ समय के लिए पैरोल पर रिहा कर दिया गया. यहीं से वह पुलिस की पकड़ से दूर होता चला गया.
पैरोल पर बाहर आने के बाद उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए अपना नाम और पूरा हुलिया बदल लिया. उसने अपना नया नाम अब्दुल रहीम कर लिया. इतना ही नहीं उसने अपना दिखावा, पहनावा और रहन-सहन में भी बड़ा बदलाव कर लिया. वह दाढ़ी बढ़ाकर कुर्ता-पायजामा पहनने लगा और मुरादाबाद जाकर गाड़ी चलाने का काम करने लगा, ताकि किसी को उस पर शक न हो.
इस संबंध में नगर पुलिस अधीक्षक मानुष पारीख ने बताया कि प्रेम नगर थाना पुलिस ने हाई कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए प्रदीप को गिरफ्तार कर लिया है. अदालत ने यह भी कहा था कि आरोपी को चार हफ्ते के भीतर बरेली मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाए. अदालत ने इस तथ्य को गंभीरता से लिया था कि आरोपी तीन दशकों से अधिक समय से फरार था और न्यायिक प्रक्रिया से लगातार बचता रहा.
पुलिस ने बताया कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य के निर्देश पर इस मामले में एक विशेष टीम बनाई गई थी. जांच टीम ने आरोपी के परिजनों और परिचितों से पूछताछ की. उनमें से कई ने दावा किया कि उन्होंने उसे लंबे समय से नहीं देखा है. इस बीच उसका भाई सुरेश पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हुआ, जिसने यह जानकारी दी कि प्रदीप शायद किसी दूसरी पहचान के साथ मुरादाबाद में रह रहा है.
तेजी से जांच आगे बढ़ी और टीम मुरादाबाद के कटघर क्षेत्र में पहुंची. स्थानीय लोगों ने पुलिस को बताया कि अब्दुल रहीम उर्फ सक्सेना ड्राइवर के नाम से एक शख्स लगभग 30 सालों से वहीं रह रहा है. इसके बाद पुलिस ने उसे वहीं से गिरफ्तार कर लिया.
पूछताछ के दौरान प्रदीप ने स्वीकार किया कि जेल से पैरोल पर निकलने के बाद उसने अपनी पुरानी पहचान छिपा ली थी. इसके लिए साल 2002 में इस्लाम धर्म अपनाया था. पुलिस के मुताबिक, अब आरोपी की उम्र 70 साल से ज्यादा हो चुकी है. गिरफ्तारी के बाद उसे सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से शुक्रवार को उसे जेल भेज दिया गया है.