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Haryana News: बांग्लादेश में दीपू दास की मॉब लिंचिंग के बाद भारत में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, आगजनी हो रही है, हिंदू संगठन के लोग बांग्लादेशी दूतावास के सामने धरना दे रहे हैं. लेकिन हैरानी की बात है कि एक तरफ हिंदूवादी संगठन के लोग बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के लिए आँसू बहा रहे हैं. वहीं, हिंदूवादी संगठन के लोग अपने देश के मुसलमानों को बांग्लादेशी बोलकर मॉब लिंचिंग कर रहे हैं.
हरियाणा में "गौरक्षकों" ने एक झुग्गी बस्ती में कई बंगाली भाषी मुस्लिम पुरुषों पर बेरहमी से हमला किया. हरियाणा के रोहतक में 21 दिसंबर को "गौरक्षकों" ने आरोप लगाया कि उस बस्ती में "रोहिंग्या" मुसलमान रहते हैं और उन पर "गोमांस" काटने और खाने का भी आरोप लगाया. क्या किसी भी गौरक्षक को यह कानूनी अधिकार है कि वह किसी भी बस्ति में जाए और मुसलमानों को रोहिंग्या और गौ मांस के आरोप लगाकर मारपीट करे?
वहीं, हिंदूवादी भीड़ ने बुधवार (24 दिसंबर) को ओडिशा के संबलपुर में एक बंगाली भाषी मुस्लिम व्यक्ति को बांग्लादेशी बताकर मॉब लिंचिंग कर दी. मृतक की पहचान पश्चिम बंगाल निवासी 30 वर्षीय जुएल शेख के रूप में हुई है, जो दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करता था. उसके साथ तीन अन्य प्रवासी मजदूर भी मौजूद थे. इसी दौरान चार से पांच अज्ञात लोग मौके पर पहुंचे और मजदूरों पर अवैध बांग्लादेशी होने का आरोप लगाते हुए मॉब लिंचिंग की.
इससे पहले हिंदूवादी भीड़ ने केरल में एक दलित युवक को बांग्लादेशी बातकर मॉब लिंचंग कर दी. इस घटना के बाद मालूम चला कि मृतक का नाम राम नारायण भायल है. अब सोचिए कि बांग्लादेश में दीपू दास की मॉब लिंचिंग पर हिंदूवादी संगठन के लोग भारत में प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन भारतीय दलित युवक की मॉब लिंचिंग पर चुप हैं. गौरतलब है कि दुनिया में कहीं भी किसी भी समुदाय, व्यक्ति पर जुल्म हो रहा है वह जुल्म है, जिसके खिलाफ मुखर होकर बोलना चाहिए.