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भागलपुर दंगों का खलनायक प्रताप मंडल को कोर्ट से मिली जमानत, पुलिस ने किया भारी बलंडर

Bhagalpur Riots Case: भागलपुर दंगे के दोषी प्रताप मंडल को पुलिस की लापरवाही की वजह से जमानत मिल गई है. अदालत ने प्रताप मंडल की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस से आरोपी के खिलाफ उस समय का FIR और चार्जशीट पेश करने को कहा था, लेकिन पुलिस द्वारा कोर्ट में चार्जशीट पेश नहीं की गई, जिसके बाद कोर्ट ने दंगाई प्रताप मंडल को जमानत दे दी है. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें. 

भागलपुर दंगों का खलनायक प्रताप मंडल को कोर्ट से मिली जमानत, पुलिस ने किया भारी बलंडर

Bhagalpur Riots Case: बिहार के इतिहास में सबसे काली घटनाओं में से एक 24 अक्टूबर 1989 का भागलपुर दंगा है. इस दंगे में लगभग 116 मुसलमानों की हत्या कर दी गई. इस मामले में वर्ष 2007 में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी शंभूनाथ मिश्रा की अदालत ने 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. प्रताप मंडल नाम के एक दंगाई को भी अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन वह फरार हो गया. वर्ष 2024 में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, लेकिन पुलिस की लापरवाही की वजह से डिस्ट्रिक्ट सेशंस कोर्ट से उसे जमानत मिल गई है. 

प्रताप मंडल नाम का दंगाई भागलपुर दंगा के आरोप में पिछले एक वर्ष से जेल में बंद था. उसने जमानत याचिका दाखिल की थी. इस जमानत याचिका पर डिस्ट्रिक्ट सेशंस कोर्ट में सुनवाई हुई. पुलिस ने सुनवाई के दौरान कोर्ट में FIR और चार्जशीट की कॉपी पेश नहीं की, जिसकी वजह से दंगाई प्रताप मंडल को जमानत मिल गई. डिस्ट्रिक्ट सेशंस जज ज्योति कुमार कश्यप ने FIR और चार्जशीट न होने की वजह से प्रताप मंडल की उम्र को देखते हुए जमानत दे दी.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रताप मंडल की जमानत याचिका पर 18 अगस्त 2025 को हुई सुनवाई के दौरान ही कोर्ट ने केस रिकॉर्ड मांगा था. पुलिस ने कोर्ट में बताया कि पटना हाई कोर्ट के आदेश पर केस रिकॉर्ड पहले ही पटना हाई कोर्ट भेजा जा चुका है. वहां पूछताछ करने पर पता चला कि सुनवाई के बाद केस का रिकॉर्ड भागलपुर सिविल कोर्ट भेज दिया गया था.

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जज  ज्योति कुमार कश्यप ने कहा कि जमानत अर्जी की सुनवाई के लिए एफआईआर और चार्जशीट का मौजूद होना जरूरी है. जज ने एसएसपी भागलूर को जगदीशपुर थाना कांड संख्या 189/164 और 90/2002 में एफआईआर और चार्जशीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि इन मामलों में आरोपियों की जमानत अर्जी पर सुनवाई हो सके. केस दोबारा खुलने के बाद तत्कालीन डीआईजी ने एफआईआर को एक साथ कर जांच की. दोनों मामलों में एफआईआर और चार्जशीट की कार्बन कॉपी अन्य मामलों की सुरक्षित कार्बन कॉपी की तरह पुलिस के पास है, लेकिन उन्हें कोर्ट में पेश नहीं किया गया.

गौरतलब है कि भागलपुर दंगा के मामले में कोर्ट ने वर्ष 2007 सब-इंस्पेक्टर समेत 14 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. जिन लोगों को सजा सुनाई गई थी, उनकी पहचान कुछ इस प्रकार है. उस समय के जगदीशपुर पुलिस स्टेशन इंचार्ज राम चंद्र सिंह, लोगैन गांव के चौकीदार ठाकर पासवान, प्रभात मंडल, रामदेव मंडल, अजब लाल मंडल, अर्जुन मंडल, सुखदेव मंडल, कुलदीप मंडल, सुभाष मंडल, येदु मंडल, नरेश मंडल, शिव लाल मंडल, जय प्रकाश मंडल और प्रताप मंडल.

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Zeeshan Alam

जीशान आलम Zee Media में ट्रेनी जर्नलिस्ट हैं. वह बिहार के छपरा के निवासी हैं और दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया है. सियासत और मुस्लिम माइनॉरिटी से जुड़ी ख़बरें वो आ...और पढ़ें

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