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Bhopal: मध्य प्रदेश में गणेश उत्सव से पहले मूर्ति बनाने और बेचने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. हिंदू संगठनों ने यह अभियान शुरू किया है कि भगवान गणेश की मूर्तियां केवल हिंदू ही बनाएं और बेचें. इसी सिम्त में 'संस्कृति बचाओ मंच' ने दुकानों और कारीगरों की चेकिंग शुरू कर दी है. मुस्लिम समाज के कारीगरों का कहना है कि हमेशा से वह यह काम करते आए हैं, लेकिन अब कुछ दंगई माहौल बिगाड़ने की फिराक में है.
संगठन का कहना है कि जिनकी भगवान और मूर्ति पूजन में आस्था नहीं है, उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता. मंच ने लोगों से अपील की है कि वे गणेश मूर्तियां उन्हीं दुकानों से खरीदें, जहां बोर्ड पर नाम और धर्म साफ लिखा हो.
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस फैसला का समर्थन किया है और कहा है कि जिनकी मूर्तियों में आस्था नहीं है, जो पूजते नहीं हैं, वे मूर्ति क्यों बनाएं और बेचें? पहले आस्था लाएं, फिर इस काम से रोज़गार करें." उन्होंने आगे यह भी कहा कि आजकल कुछ कट्टरपंथी और मुस्लिम थूक जिहाद फैला रहे हैं. ऐसे में क्या भरोसा कि आस्था से जुड़ी मूर्तियों की मिट्टी और रंग में मिलावट न की जाए."
वहीं, भोपाल के मुस्लिम कारीगर खुद को बेबस बताते हुए कहते हैं कि यह भेदभाव सही नहीं है. एक कारीगर ने कहा,"हिंदू हमारे धर्मग्रंथ छापते हैं, हमें कोई एतराज़ नहीं होता. मुस्लिम कारीगर बरसों से बड़ी तादाद में मूर्तियां बनाते आ रहे हैं. लेकिन कुछ कट्टरपंथी जानबूझकर माहौल बिगाड़ रहे हैं और हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा खड़ा कर रहे हैं."
कारीगरों का कहना है कि मूर्ति बनाना उनका रोज़गार है और यह परंपरा सालों से चली आ रही है. लेकिन अब धार्मिक आधार पर इस काम को बांटने की कोशिश की जा रही है, जो समाज में तनाव बढ़ा सकती है.
हिंदू संगठनों के इस अभियान और नेताओं के बयानों के बाद से भोपाल सहित कई इलाकों में मूर्ति बनाने वाले कारीगरों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है. जहां हिंदू संगठन इसे "आस्था की रक्षा" बता रहे हैं, वहीं मुस्लिम कारीगर इसे "सांप्रदायिक माहौल खराब करने की कोशिश" मान रहे हैं.