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Bihar Assembly Election 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी महागठबंधन ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है, इसके साथ में विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के अध्यक्ष मुकेश सहनी को उपमुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया है. इस फैसले के बाद बिहार में एक नई बहस छिड़ गई और विपक्षी दलों ने महागठबंधन के फैसले को आड़े हाथों लिया.
ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने बिहार की सत्ता में मुसलमानों को उचित भागीदारी न देने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. इसको लेकर उत्तर प्रदेश AIMIM प्रमुख शौकत अली ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिये तंज कसा है. शौकत अली ने अपनी पोस्ट में लिखा कि "2 फीसदी वाला उपमुख्यमंत्री, 13 फीसदी वाला मुख्यमंत्री, 18 फीसदी वाला दरी बिछावन मंत्री." उन्होंने आगे लिखा, "इसलिए जब हम कुछ कहेंगे तो बोलेंगे अब्दुल तू चुप बैठ वरना बीजेपी आ जायेगी."
2% वाला उपमुख्यमंत्री 13%वाला मुख्यमन्त्री 18%वाला दरी बिछावन मन्त्री,जब हम कुछ कहेंगे तो बोलेंगे अब्दुल तू चुप बैठ वरना बीजेपी आजायेगी। pic.twitter.com/WdGQL19Afz
— Shaukat Ali (@imshaukatali) October 23, 2025
शौकत अली की यह टिप्पणी उस नाराजगी को दर्शाती है जिसमें उन्होंने सवाल उठाया कि बिहार में मुस्लिम समुदाय की आबादी लगभग 18 फीसदी है, जब उस समुदाय के किसी भी नेता को न तो मुख्यमंत्री और न ही उपमुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया गया. उन्होंने कहा कि जब मुसलमान अपना हक मांगते हैं तो उन्हें बीजेपी का डर दिखाया जाता है. इससे पहले बिहार AIMIM प्रमुख ने महागठबंधन में शामिल होने के लिए कांग्रेस-RJD के सामने प्रस्ताव रखा था. हालांकि, उनके प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था.
जानकारी के मुताबिक, बिहार में करीब 17.7 फीसदी मुस्लिम आबादी है. इनमें से 11 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाता 40 फीसदी से ज्यादा हैं. वहीं, 47 सीटों पर मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं. ऐसे में AIMIM ने सवाल उठाया है कि इतनी बड़ी आबादी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया जा रहा. AIMIM की यह मांग एक्सपर्ट उचित भी मानते हैं, लेकिन दूसरी तरफ कुछ लोगों का कहना है कि दक्षिणपंथी पार्टियों के जरिये लगातार की जा रही धुव्रीकरण की राजनीति की वजह से महागठबंधन ने मुस्लिम चेहरों को बड़े पद जगह नहीं दिया है.