JDU FIR on Journalist: वक्फ संशोधन बिल का जेडीयू के सांसदों ने दोनों सदनों जोरशोर से समर्थन किया था. इस बिल के पास होते ही बिहार के सियासत में भूचाल आ गया. नीतीश कुमार की सरकार से तरह-तरह के सवाल पूछ जाने लगे. जेडीयू के मुस्लिम नेताओं से तीखे सवाल पूछने और सोशल मीडिया पोस्ट करने पर एक पत्रकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है.
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Bihar News Today: बिहार प्रशासन के तानशाही रवैये ने एक पत्रकार और उनके परिवार को दहशत में डाल दिया. पूर्वी चंपारण के रहने वाले पत्रकार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इफ्तार पार्टी में शामिल होने वाले नेताओं से सवाल पूछ लिया. यह बात जेडीयू के नेताओं को इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने गंभीर धाराओं में पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज कराया है.
दरअसल, डिजिटल प्लेटफॉर्म से संचालित की जाने वाली मिल्ली खबर के एडिटर फजलुल मुबीन ने इफ्तार पार्टी में मौजूद लोगों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की. इस फोटो को पोस्ट करते हुए उन्होंने पार्टी में मौजूद लोगों की आलोचना करते हुए कैप्शन भी लिखा.
मिल्ली खबर के एडिटर फजलुल मुबीन ने अपनी पोस्ट के कैप्शन में लिखा, "मुझे आपको यह बताते हुए शर्म आ रही है कि इन लोगों का ताल्लुक बिहार के ढाका से है. इनके लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, इमारत शरिया, मुस्लिम पर्सनल लॉ, जमीयत अहले हदीस और जमीयत उलेमा से ऊपर हैं." उन्होंने आगे लिखा, "वक्फ हमारा संवैधानिक अधिकार है और यह हमारी शरीयत का भी मामला है. इसलिए इसका खास ख्याल रखें."
पत्रकार फजलुल मुबीन की यह पोस्ट जेडीयू नेताओं को इतनी नागवार लगी कि उन्होंने पुलिस में एफआईआर दर्ज करा दी. इस पोस्ट के बाद जेडीयू किसान सेल के नेता असगर अली ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. इस मामले फजलुल मुबीन पर भारतीय न्याय संहिता की संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है.
जेडीयू किसान सेल के नेता असगर अली ने पत्रकार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत धारा 352 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर अपमान करना), धारा 356 (2) (मानहानि) और धारा 302 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना) में एफआईआर दर्ज किया है.
एक निजी मीडिया संस्थान से बातचीत में पत्रकार फजलुल मुबीन ने अपनी पोस्ट का बचाव करते हुए कहा, "मैंने तो सिर्फ सवाल पूछा किया ये मुस्लिम नेता संवेदनशील मुद्दों पर चुप क्यों रहते हैं. इसके उलट इफ्तार पार्टी में खाना खाने के लिए चले गए." उन्होंने कहा, "सवाल पूछना मेरा संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है."
फजलुल मुबीन ने साफ किया कि मेरे जरिये पोस्ट की गई सभी तस्वीरें पहले से पब्लिक प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि "बहुत सी तस्वीरें लोगों ने पहले ही फेसबुक पर पोस्ट कर दी थीं. मैंने इस में कुछ भी चुराया या एडिट नहीं किया है." मुबीन के मुताबिक, "उन्होंने जिन लोगों की तस्वीरें शेयर की है, उनमें से कुछ लोगों ने उनसे कांटैक्ट किया है." उन्होंने बताया कि कॉल करने वालों में से एक ने कहा कि अगर तुम आकर माफी मांग लो, तो मामला सुलझ जाएगा. लेकिन जब मैंने कुछ गलत किया ही नहीं तो मैं मॉफी क्यों मांगूं?"
'सियासत डेली' में छपी खबर के मुताबिक, मिल्ली खबर के एडिटर फजलुल मुबीन ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई पत्रकारों पर होने वाले अत्याचार और सच बोलने पर उनके ऊपर बनाए जाने दबाव को बयां करती हैं. उन्होंने कहा कि वे हमें डराना चाहते हैं ताकि हम लोग सच बोलना बंद कर दें, लेकिन मैं पीछे नहीं हटूंगा. मुबीन ने कहा,"मैंने जो कुछ भी पोस्ट किया है, मेरे पास सुबूत के तौर उसके स्क्रीनशॉट मौजूद हैं."
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