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Bihar Nawada Mob Lynching News: बिहार मॉब लिंचिंग में मारे गए अतहर हुसैन की विधवा की रिक्वेस्ट पर और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रेसिडेंट मौलाना अरशद मदनी की पहल पर, जमीयत उलेमा-ए-हिंद लीगल एड कमेटी केस में पूरी मदद देने वाली है.
यह कमेटी एक इंटरवेनर के तौर पर पिटीशन फाइल करेगी. इस बारे में, जमीयत उलेमा-ए-हिंद की लीगल टीम अनुभवी, क्रिमिनल वकीलों का एक रेगुलर पैनल बनाने जा रही है, ताकि न सिर्फ वारिसों को इंसाफ मिल सके, बल्कि कातिलों को भी सज़ा मिले.
6 दिसंबर को, मृतक की पत्नी ने एक FIR दर्ज कराई थी, जिसमें दस लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था और दस से पंद्रह अनजान लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी. अब तक इस केस में चार नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
जमीयत उलेमा बिहार ने भी कुछ पैसे की मदद की पेशकश की है और हर मुमकिन मदद का भरोसा दिया है. हाल ही में बिहार जमीयत उलेमा का एक डेलीगेशन नवादा के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर और पुलिस कैप्टन अभिनव धामी से मिला था और इस बारे में लोकल SP को एक मेमोरेंडम भी दिया था. DM नवादा रवि प्रकाश ने इस मौके पर डेलीगेशन को भरोसा दिलाया था कि मृतक के साथ इंसाफ़ होगा, यह बहुत ज़रूरी है.
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रेसिडेंट मौलाना अरशद मदनी ने सवाल किया कि अगर बिहार के नालंदा में एक गरीब रेहड़ी वाले अतहर हुसैन को उसका नाम और धर्म पूछकर मार दिया गया, तो देश का बायस्ड मीडिया अब चुप क्यों है? क्या इसलिए कि मरने वाला मुसलमान था, यह डबल रोल क्यों? उन्होंने कहा कि ज़ुल्म तो ज़ुल्म होता है, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि वह हिंदू है या मुसलमान. अगर हम इंसान होने का दावा करते हैं, तो हमें हर तरह के ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ उठानी चाहिए.
मौलाना मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद ऐसी घटनाओं का होना इसका सबूत है कि उन्हें पॉलिटिकल प्रोटेक्शन और सपोर्ट है. उन्होंने इस बात पर भी गहरा अफ़सोस जताया कि पुलिस ने अतहर हुसैन के कातिलों पर मामूली धाराओं में केस दर्ज किया, जबकि अतहर हुसैन ने हॉस्पिटल में अपना बयान दर्ज कराया था.
उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नेताओं के दबाव के कारण अब सेक्शन 302 जोड़ा गया है, लेकिन इससे सरकार का चेहरा बेनकाब हो गया है और यह साफ़ हो गया है कि जो लोग सत्ता को ही सब कुछ मानते हैं, उनकी नज़र में इंसान की जान की कोई कीमत नहीं रह गई है.